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मध्य प्रदेश

भोपाल में एसपी के नाम पर वसूली का खेल!

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी में धड़ल्ले से खुलेआम वसूलीबाजों की गुण्डागर्दी और जबरिया वसूली चल रही है। आश्चर्य जनक पहलू ये है कि इस वसूली में बेहिचक राजधानी के एम.पी. नगर क्षेत्र में जो पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मात्र आधा एक किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पर थाना एम.पी. नगर के कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर फाइनेंस कम्पनी के रसूखदार गुण्डों ने हडक़म्प मचा रखा है। वहीं सीधे कर्जदारों से पुलिस अधीक्षक के नाम पर वसूली की कार्यवाही की जा रही है। इस वसूली में कुछ पुलिस वाले अंजाम देकर मोटी रकम कमा रहे हैं।

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी में धड़ल्ले से खुलेआम वसूलीबाजों की गुण्डागर्दी और जबरिया वसूली चल रही है। आश्चर्य जनक पहलू ये है कि इस वसूली में बेहिचक राजधानी के एम.पी. नगर क्षेत्र में जो पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मात्र आधा एक किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पर थाना एम.पी. नगर के कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर फाइनेंस कम्पनी के रसूखदार गुण्डों ने हडक़म्प मचा रखा है। वहीं सीधे कर्जदारों से पुलिस अधीक्षक के नाम पर वसूली की कार्यवाही की जा रही है। इस वसूली में कुछ पुलिस वाले अंजाम देकर मोटी रकम कमा रहे हैं।

मामला बड़ा रोचक और गंभीर है क्योंकि शहर के बीचों बीच राजधानी में ये खेल खुलेआम चल रहा है। जिसमें ये कहा जा सकता हैं कि पुलिस अधीक्षक के पद की गरिमा को महकमे के कुछ करिंदें चन्द रुपयों के खातिर बदनाम कर रहे है। आईये आपको बताते है ये पूरी कहानी..
 
घटना दिनांक 24 अप्रैल 2013 समय शाम 5:30 बजे से शाम 7 बजे की है घटना स्थल प्रेस काम्प्लेक्स एम.पी.नगर जोन-1 जहां करीब 5:30 बजे टाटा फाइनेंस के तयशुदा गुण्डे जीतू एस. सोलंकी संचालक श्री सोलंकी सर्विस शॉप नम्बर 240, बी.डी.ए. कॉम्प्लेक्स, 7 नम्बर बस स्टेण्ड, शिवाजी नगर और उसका एक साथी आते हैं और कार फाइनेंस रकम की वसूली जबरिया करने की कोशिश करते हैं और जबरिया गाड़ी की चाबी छीनने का प्रयास करते है। वसूलबाज अपने आपको पत्रकार बताते हुए एक प्रेसकार्ड जेब से निकालकर दिखाया और धमकाने लगे। इसका मतलब हैं कि इन गुण्डों ने पत्रकारिता की पवित्रता का इस्तेमाल वसूलीबाजी भी कर रहे है। वहीं अपने आपको पत्रकारिता से जुड़ी एक संस्था का सदस्य भी बताते हैं।

फर्जी पत्रकार बनकर वसूली करने वाले इस शख्स ने आकर कहा कि गाड़ी को खींचने के आर्डर हो गये हैं और कहा कि भोपाल एस.पी. श्री अंशुमान को बता दिया है। उन्होंने ही कहा है कि गाड़ी को उठा लाओ। उन्हीं के कहने पर हम लोग गाड़ी उठाने आये हैं। इस पर जब पार्टी ने आदेश दिखाने की बात कही तो जीतू सोलंकी ने फर्जी कागजात दिखाते हुए पुलिस को बुलाने की धमकी दे डाली। वहीं पुलिस थाने में सेटिंगबाज पुलिसकर्मी से मोबाइल पर बात की और पार्टी से बात कराया। मोबाइल पर थाना एम.पी. नगर का एक पुलिसकर्मी रंजीत मिश्रा था, जो बोल रहा था कि पुलिस अधीक्षक अंशुमान सिंह के आदेश पर ही हम आपको कह रहे हैं कि इन लोगों को गाड़ी सौप दें। मैं थाना एम.पी.नगर से पुलिस भेज रहा हूं। वहीं मुकेश नामक कर्मी को भेजने की बात कही।

वसूलीबाजों की मदद करते चीता पुलिसकर्मी

इस घटना के करीब पन्द्रह मिनट बाद ही वसूलीबाज के कहने पर दो पुलिसकर्मी चीता लेकर घटनास्थल पर आ गये और इन गुण्डों का समर्थन करने लगे। इसी दौरान घटना स्थल पर कुछ पत्रकार इकट्ठा हो गये, जिन्होंने इस अवैध अड़ीबाजी की कहानी की जानकारी नगर पुलिस अधीक्षक से बताई तो सब दूध का दूध पानी का पानी हो गया। वहीं चीता से पहुंचे पुलिसकर्मियों से जब नगर पुलिस अधीक्षक ने रिपोर्ट मांगी तो उन्होंने सुरक्षा की दृष्टि बताते हुए अपने रजिस्टर में रिपोर्ट दर्ज की और थाने जाकर इन अड़ीबाजों पर कार्यवाही करने की बात कहने लगे, परन्तु आज दिवस तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी।

फर्जी पत्रकार बनकर अड़ीबाजी

जीतू सोलंकी जैसे वसूलीबाजों ने पुलिस और कुछ पत्रकारों से सांठ-गांठ कर रखी है, वहीं बकायदा जेब में प्रेस कार्ड रखकर घूमते हैं, जबकि इनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहता। जीतू सोलंकी जैसे फर्जी लोगों के कारण ही पत्रकारिता बार-बार बदनाम होती रही है। ऐसे फर्जी लोगों के खिलाफ शीघ्र प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की जाना चाहिए जो पत्रकारिता की आड़ में फाइनेंस कम्पनियों के लिए अड़ीबाजी वसूली करते हैं, जिससे पत्रकारिता और पत्रकारों की छवि धूमिल हो रही है। फर्जी पत्रकार बनकर पुलिस कर्मियों से सांठ-गांठ करने की शिकायत भी वरिष्ठ अधिकारियों से की गई है अब देखना हैं कि सही कार्यवाही कब तक होती है।

वसूली के लिए पुलिस अधीक्षक के नाम का इस्तेमाल

इन अड़ीबाजों के हौंसले इतने बुलंद हैं कि फाइनेंस कम्पनी के तय गुण्डे छोटे मोटे पुलिस कर्मियों से सेंटिग करके अपनी दुकान चलाते हैं। वहीं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का सीधे नाम लेने से भी नहीं चूकते, कोई जानकार अगर अधिकारियों से बात करने की बात कहे तो ये लोग थाने में सेटिंग किये गये पुलिस वालों से उनके मोबाइल नम्बर पर अपने मोबाइल पर बात करवा कर पूरी तरह डराते धमकाते हैं। अगर कोई झांसे में आ जाये तो ये लोग प्राप्त रकम से हिस्सा बांटते हैं। कुछ पुलिस कर्मी भी इनका साथ खुलेआम देते हैं और उच्चाधिकारी के नाम पर डरा-धमका कर वसूली करवाते हैं, अगर पुलिस अधीक्षक महोदय इस मामले को गंभीरता से लेते हैं और सही जांच करवाते है तो कई लोग की पोल खुल जायेगी।

वसूलीबाजों ने किस किस से की सेटिंग

वसूलीबाज जीतू एस. सोलंकी ने उक्त समयावधि में किस-किस पुलिस कर्मियों और अन्य लोगों से मोबाइल लगाकर बात की और उनके माध्यम से डराया धमकाया जांच की जाना चाहिये वर्ना पुलिस विभाग के नाम का दुरुपयोग करने वाले ये लोग जनता को यू ही डरा धमका कर लूटते फिरेगें और पुलिस विभाग हाथ मलता रह जाएगा।

वसूलीबाज गाड़ी हथिया कर फरार हो जाते

उक्त घटना के दौरान कई पत्रकार स्थल पर पहुंच गये थे जिस कारण वसूलीबाज जीतू सोलंकी एवं उसका साथी अपने षडय़ंत्र में कामयाब नहीं हो सके। वर्ना ये लोग पुलिस वालों की मदद से गाड़ी हासिल कर फरार हो जाते।

भोपाल से संजय शर्मा की रिपोर्ट.

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