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गाजीपुर

जावेद के बच्‍चों को स्‍कूल से निकालने वाले पूर्व सांसद के खिलाफ एनसीआर दर्ज

वाराणसी। बीते एक साल से अपने बच्चों के शिक्षा के अधिकार और खुद के साथ हुए बदसलूकी के विरोध में इंसाफ के लिए प्रशासनिक संवेदनहीनता और लालफीताशाही से लड़ रहे जावेद की आखिरकार अदालत ने सुन ली। अदालत के आदेश के बाद पूर्व सांसद और एमजेआरपी पब्लिक स्कूल के संचालक पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा के खिलाफ दफा 424, 500, 504, 506 आईपीसी के तहत गाजीपुर कोतवाली में एनसीआर दर्ज कर लिया गया है।

वाराणसी। बीते एक साल से अपने बच्चों के शिक्षा के अधिकार और खुद के साथ हुए बदसलूकी के विरोध में इंसाफ के लिए प्रशासनिक संवेदनहीनता और लालफीताशाही से लड़ रहे जावेद की आखिरकार अदालत ने सुन ली। अदालत के आदेश के बाद पूर्व सांसद और एमजेआरपी पब्लिक स्कूल के संचालक पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा के खिलाफ दफा 424, 500, 504, 506 आईपीसी के तहत गाजीपुर कोतवाली में एनसीआर दर्ज कर लिया गया है।

गौरतलब हो कि न्यू कालोनी गाजीपुर के रहने वाले जावेद के दोनो बच्चें नाजिया और यासिर एमजेआरपी स्कूल में पढ़ते थे। एक महीने की फीस देने में हुई देरी के चलते जावेद ने जब स्कूल के प्रबंधक जगदीश कुशवाहा से अपनी असमर्थता जताते हुए कुछ और समय मांगा तो इस पर आपे से बाहर होकर जगदीश कुशवाहा ने जावेद से कहा कि फीस नहीं दे सकते तो क्यों पैदा किये बच्चे, इतना ही नहीं प्रबंधक ने बच्चों का बस्ता छीनकर उन्हें स्कूल से बाहर कर दिया था। अपने साथ हुए घटना के विरोध में जावेद जिलाधिकरी से लगायात बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित तमाम सरकारी महकमों में अर्जिया लिखकर इंसाफ की गुहार लगाते रहे लेकिन सत्ता की हनक और पूर्व सांसद के नाते पूरा प्रशासनिक महकमा मौन साधे रहा।

अंतत: थक-हारकर जावेद ने बीते 6 नवम्बर 2012 को गाजीपुर की अदालत में वाद दाखिल किया जिस पर अदालत ने 25 फरवरी 2013 को पुलिस से मामले की जांच कर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद भी पूर्व सांसद के पक्ष में पुलिस मामले को टालती रही। इसी बीच जावेद ने दो बार न्यायालय से इस मामले में प्रगति की आख्या मांगी। अंत में जब कोर्ट ने इस मामले में सख्ती दिखाई तो बीते सोमवार पुलिस ने पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा के खिलाफ एनसीआर दर्ज किया।

इस बारे में नाजिया और यासिर के पिता जावेद अहमद का कहना है कि मेरे बच्चों के साथ अन्याय हुआ प्रबंधक ने स्कूल बैग छीनकर उन्हें स्कूल के बाहर कर दिया। स्कूल में सबके सामने मुझे भी बेइज्जत किया गया। इंसाफ के लिए मैं जिलाधिकारी से लेकर उच्च शिक्षा अधिकारियों के समक्ष फरियाद लेकर जाता रहा लेकिन मेरी किसी ने भी नहीं सुनी। उल्टे मेरे उपर दवाब बनाया जाता रहा कि मैं चुप रहूं। न्यायालय के आदेश ने मुझे ताकत मिली है। मैं इंसाफ के लिए लड़ता रहूंगा।

मूल खबर के बारे में जानने के लिए क्लिक करें – पूर्व सांसद का वक्तव्य- ''फीस नहीं दे सकते तो बच्चे क्यों पैदा किए?'' (सुनें टेप)

बनारस से भास्‍कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट.

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