Rajiv Nayan Bahuguna : भविष्य में यदि आप उत्तराखंड जैसी आपदा में फंस जाए तो क्या करें….
1- घबराएं नहीं. विमान दुर्घटना में हताहतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साबित होता है कि कई यात्री विमान के भूलुंठित होने से पहले ही आकाश में सदमे से मर जाते हैं. घबराहट में आप उचित निर्णय नहीं ले सकते.
2- तेज बारिश होने की स्थिति में चट्टान य गुफा के नीचे शरण लेने की बजाय किसी मज़बूत पेड़ के नीचे खड़े हो जाएँ या खुले में.
3- देखें कि आपके ऊपर या नीचे कोई कमज़ोर पहाड़ तो नहीं?
4- जब बारिश थम जाये तो मलबे के ढेर को पार न करें, वह दरक सकता है. जहाँ से मलबा आना शुरू हुआ है, वहां ऊपर से पार करें, चाहे कितनी भी चढाई चढनी पड़े.
5- बारिश थमने के बाद और धूप आ जाने पर बे परवाह न हो जाएँ . धूप पड़ने से जिन चट्टानों में पाणी भरा है , वह अक्सर दरकती हैं .
6- दौड़ न लगाएं. आगे-पीछे, ऊपर-नीचे देखते चलें.
7- रसद खत्म होने पर जंगली फल अथवा पत्तियां खाएं. पहाड़ पर कुछ बूटियाँ विषैली हैं लेकिन वृक्षों के उत्पाद सुरक्षित हैं.
8- आपदा में रात बितानी पड़ जाए, तो किसी भी सूखे नाले या घाटी में न रहें, वहाँ कभी भी पानी आ सकता है.
9- यदि एकांत में कोई ठग, लुटेरा मिले तो अपने मोबाइल फोन से किसी से बात करने का नाटक करें, यह आभास दें कि आपके साथी आस-पास ही हैं. मोबाइल फोन न हो तो ऐसे ही किसी का नाम लेकर झूठी आवाज़ लगाएं.
उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा के फेसबुक वॉल से.





