सीजेएम लखनऊ श्री प्रमोद कुमार ने आज उत्तर प्रदेश आईपीएस एसोसियेशन के विधिविरुद्ध होने पर एफआईआर कराने मेरे प्रार्थनापत्र पर मेरे अधिवक्ता श्री त्रिपुरेश त्रिपाठी की बहस सुन कर थाना महानगर, लखनऊ से रिपोर्ट मंगवाई है. मामले की अगली सुनवाई 04 जुलाई को होगी.
मैंने प्रार्थनापत्र में कहा कि यूपी पुलिस रेगुलेशन के पैरा 398 के अनुसार आईपीएस अधिकारी पुलिस बल के सदस्य हैं, अतः पुलिस बल (अधिकारों का शमन) एक्ट 1966 की धारा 3(1) के अनुसार वे बिना केन्द्र अथवा राज्य सरकार की स्पष्ट अनुमति के कोई ऐसी संस्था नहीं बना सकते जो पूर्णतया सामाजिक, धार्मिक एवं मनोरंजक नहीं हो. आरटीआई से प्राप्त सूचना के अनुसार इस एसोसियेशन को किसी स्तर पर कोई अनुमति नहीं मिली हुई है.
अतः मैंने यूपी आईपीएस एसोसियेशन के पुलिस बल (अधिकारों का शमन) एक्ट की धारा 4 के अंतर्गत अपराध होने के नाते इसके पदाधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की मांग की. थाना महानगर द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं कर मात्र पीली पर्ची की रसीद दी गयी. तब मैंने धारा 154(3) सीआरपीसी के तहत एसएसपी लखनऊ को एफआईआर दर्ज करने के लिए प्रार्थनापत्र भेजा और उसके बाद धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत कोर्ट में आवेदन किया.





