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गोरखपुर

जिला होम्योपैथी अधिकारी सहित तीन स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज

देवरिया। होम्योपैथी विभाग में हुए अस्सी लाख रुपए के घोटाले के मामले में जिला प्रशासन दोषियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में टाल मटोल कर रहा था कि इस बीच मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने जिला होम्योपैथी अधिकारी (डीएचओ) समेत तीन स्वास्थ्य कर्मियों के विरूद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने का आदेश दिया है।

देवरिया। होम्योपैथी विभाग में हुए अस्सी लाख रुपए के घोटाले के मामले में जिला प्रशासन दोषियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में टाल मटोल कर रहा था कि इस बीच मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने जिला होम्योपैथी अधिकारी (डीएचओ) समेत तीन स्वास्थ्य कर्मियों के विरूद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने का आदेश दिया है।

न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पुलिस ने बिना कोई विलम्ब किए आरोपियों के खिलाफ कोतवाली थाने में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468 व 471 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमा दर्ज होने से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है।

उल्लेखनीय है कि जिला होम्योपैथ विभाग में पिछले करीब एक दशक से कर्मचारियों के जीपीएफ एवं अन्य भुगतानों के मामले में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही थी। बताया जाता है कि इस सम्बन्ध में शिकायत मिलने पर पूर्व जिलाधिकारी रविकान्त सिंह ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर अमर नाथ तिवारी को जांच सौंपी थी। रिपोर्ट में करीब अस्सी लाख रुपए की हेरा-फेरी किए जाने का मामला सामने आया। जिसमें जिला कोषागार एवं कुछ बैंकों की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

इस सम्बन्ध में जिला प्रशासन ने बेसिक शिक्षा विभाग के लेखाकार से भी मामले की जांच कराई। लेखाकार ने भी वित्तीय दुरुपयोग किए जाने की पुष्टि कर दी। लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों जिला प्रशासन मुकदमा दर्ज कराने से बच रहा था। निवर्तनमान जिलाधिकारी विवके ने तो यहां तक निर्देश दिया था कि यदि चालीस लाख रुपया दोषी कर्मचारी जमा कर देंगे तो उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं होगी। हालांकि शासन ने देवरिया के होम्योपैथ विभाग में कई वर्षों से एक ही पटल पर कुण्डली जमा कर बैठे एक दबंग कर्मचारी शैलेन्द्र सिंह को निलम्बित कर दिया है। परन्तु जिला प्रशासन एफआईआर दर्ज कराने के मामले में पेशोपेश में पड़ा हुआ था।

लेकिन इसी बीच एक स्वास्थ्य कर्मचारी ने दोषियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सरकारी धन के गबन एवं धोखाधड़ी किए जाने से सम्बन्धित प्रार्थना पत्र दे दिया। न्यायालय ने प्रकरण को गंभीर मानते हुए एफ आई आर दर्ज किए जाने का निर्देश दिया। जिसके आधार पर कोतवाली थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर दी गई है।

इस सम्बन्ध में इन्सपेक्टर राम औतार यादव ने बताया कि गौरी बाजार स्थित होम्योपैथी चिकित्सालय देवंगांव में तैनात फार्मासिस्ट अनिल कुमार ने गाजियाबाद में पढ़ रहे अपने लड़के के दुर्घटनाग्रस्त होने पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए डी एच ओ को आवेदन किया था। भुगतान के लिए सम्बन्धित लिपिक शैलेन्द्र सिंह केे पास वह कई वर्षों तक दौड़ता रहा। बाद में पता चला कि लिपिक ने सांठ-गांठ कर देयकों का फर्जी तरीके से भुगतान करा लिया है। मामले की जांच कर जब जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी गई तो शिकायत सही पाई गई। लेकिन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नही कराया गया।

इसी आधार पर फार्मासिस्ट अनिल कुमार ने धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत न्यायालय में वाद दाखिल किया। जिसके आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुमारी इन्दु द्विवेदी ने प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को उचित धाराओं में पंजीकृत करने का आदेश दिया है। जिसके आधार पर डीएचओ डाक्टर सुभाष चन्द्र वर्मा, लिपिक शैलेन्द्र कुमार सिंह व रामवृक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। खबर है कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए उच्च न्यायालय जाने की फिराक में है।

देवरिया से ओपी श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.

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