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उत्‍तराखंड त्रासदी पर सोनिया और बहुगुणा के हंसते फोटो को लेकर बवाल

उत्तराखंड त्रासदी से पूरे देश में शोक की लहर है वहीं देश के माननीय नेताओं के राहत पहुंचाने के दावों के मुस्कुराते हुए विज्ञापन हैं. जी हां ऐसा वाक्या पेश आया है उत्तराखंड सरकार ने छवि सुधारने के लिए लाखों खर्च करके अखबारों में जो विज्ञापन छपवाए हैं उनमें सोनिया गांधी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की मुस्कुराती हुईं तस्वीरें छापी गईं.

उत्तराखंड त्रासदी से पूरे देश में शोक की लहर है वहीं देश के माननीय नेताओं के राहत पहुंचाने के दावों के मुस्कुराते हुए विज्ञापन हैं. जी हां ऐसा वाक्या पेश आया है उत्तराखंड सरकार ने छवि सुधारने के लिए लाखों खर्च करके अखबारों में जो विज्ञापन छपवाए हैं उनमें सोनिया गांधी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की मुस्कुराती हुईं तस्वीरें छापी गईं.

दोनों नेताओं की मुस्कुराती तस्वीरों के चलते उत्तराखंड सरकार लोगों के निशाने पर है. इसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भी तस्वीर है.ये तस्वीरें लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही हैं. हालांकि बाद में उत्तराखंड सरकार ने इस गलती को सुधारते हुए मंगलवार को अखबारों में नया विज्ञापन जारी किया.

उत्तराखंड सरकार ने 'मुसीबत की घड़ी में साथ रहने की प्रतिज्ञा' वाले विज्ञापन में आम लोगों तक पहुंचाई गई राहत के बड़े-बड़े दावे किए गए हैं. सेना से आगे सरकार का नाम जोड़ते हुए 83 हजार लोगों को बचाने का दावा किया गया है, जबकि साफ है कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन सेना के बलबूते ही चल रहा है. लोगों को सरकारी अधिकारी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं.

किसी तरह जान बचाकर आए लोग भी स्थानीय प्रशासन को कोस रहे हैं, जबकि सेना के जवानों को दुआएं दे रहे हैं. हाल इतना बुरा है कि बहुगुणा सरकार अपने काम का बखान भी ठीक से न कर सकी. विज्ञापनों में वर्तनी की भी गलतियां हैं. जिसे लोगों ने मूर्खतापूर्ण और असंवेदनशील करार दिया है.

इस एड कैंपेन में खामियां सिर्फ फोटो तक सीमित नहीं थी. इन एड में वर्तनी में चौंकाने वाली गलतियां थी. पहले दिन, Uttarakhand की जगह "Uttrakhand" छपा. वहीं, "relief measures" बन गया "relief measurers". हालांकि, मंगलवार को राज्य का नाम तो सही हो गया पर "relief measurers" अपनी जगह पर बना रहा. ऐसे में जब एक एक पैसे की मदद पीड़ितों को राहत पहुंचा सकती है ऐसे में सिर्फ कोरी विज्ञापनबाजी पर लाखों रुपये पानी में बहा देना कहां तक उचित है. (सहारा)

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