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कात्यायनी ने चार लोगों को भेजा मानहानि का नोटिस

प्रति, 1. अजय प्रकाश, नई दिल्ली, 2. सत्येन्द्र कुमार, लखनऊ, 3. ओम प्रकाश सिन्हा, लखनऊ, 4. मुकुल श्रीवास्तव, गोरखपुर, 5. देवेन्द्र प्रताप, मेरठ (प्रतिवादीगण)

प्रति, 1. अजय प्रकाश, नई दिल्ली, 2. सत्येन्द्र कुमार, लखनऊ, 3. ओम प्रकाश सिन्हा, लखनऊ, 4. मुकुल श्रीवास्तव, गोरखपुर, 5. देवेन्द्र प्रताप, मेरठ (प्रतिवादीगण)

द्वारा,
1.    जन चेतना पुस्तक प्रतिष्ठान, सचिव, राम बाबू पाल, डी-68 निराला नगर, लखनऊ
2.    राहुल फाउण्डेशन, अध्यक्ष कात्यायनी, एमआईजी-135, राप्ती नगर गोरखपुर
3.    अरविन्द मेमोरियल ट्रस्ट, ट्रस्टी सत्यम वर्मा, 69 A -1 बाबा का पुरवा, लखनऊ
4.    कात्यायनी, पत्नी एसपी सिन्हा (शशि प्रकाश सिन्हा), 69 A -1 बाबा का पुरवा, लखनऊ
5.    राम बाबू पाल, पुत्र श्री बालगोविन्द पाल, 69 बाबा का पुरवा लखनऊ।
6.    सत्यम वर्मा पुत्र डॉ. एलबी वर्मा (लाल बहादुर वर्मा), c/o डी-68 निराला नगर, लखनऊ (वादीगण)

1.    मुवक्किल नं0-1, प्रगतिशील पुस्तक सोसाइटी, प्रगतिशील विचारों के प्रचार हेतु एवं पूंजीवादी स्वार्थ, लालच की विचारधारा के विरोध में पुस्तकों का प्रचार-प्रसार।
2.    मुवक्किल नं0-2, राहुल सांकृत्यायन से प्रेरित कार्यो को आगे बढ़ाने की संस्था एवं प्रकाशन कार्य।
3.    मुवक्किल नं0-3, अरविन्द सिंह के विचारों के लिये ट्रस्ट एवं अरविन्द मार्क्सवादी  अध्ययन संस्थान के द्वारा बौद्धिक कार्य।
4.    मुवक्किल नं0-4, बड़ी कवियत्री, बड़ी पत्रकार एवं चर्चित कार्यकर्ता
5.    मुवक्किल नं0-5, महान कलाकार, बड़े पत्रकार, अनुराग बाल ट्रस्ट के अध्यक्ष
6.    मुवक्किल नं0-6, वरिष्ठ पत्रकार, महान अनुवादक, अध्यक्ष, जनचेतना सोसाइटी
उपरोक्त तीनों व्यक्ति निःस्वार्थ भाव से समाज सेवा के काम में लगे हैं, अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ एवं सम्मानित बुद्धिजीवी है और समाज में उन्हें बहुत सम्मान प्राप्त है।
प्रतिवादी 1,2,3,4, 5 भी पहले हमारे साथ जुड़े थे लेकिन उनकी विश्वसनीयता सामान्य से भी नीचे थी। 2,3,4 को उनके नकारात्मक सोच एवं र्काो के कारण संस्था से निकाल दिया गया और 2 नं0 खुद ही निकल गये।

इन चारों लोगों ने मिलकर हमारे खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से कुत्सा प्रचार करना शुरू किया, इसमें जन ज्वार डाट काम जो 1 नं0 के द्वारा संचालित किया जाता है, उसकी सहयोगी भूमिका थी। इससे हमारे मुवक्किलों के सम्मान की अपूर्णीय क्षति हुयी। कुत्सा प्रचार की झूठी आरोप निम्न हैः-

1.    कि हमारे मुवक्किल समाज कार्य के नाम पर धंधा करते हैं।
2.    कार्यकर्ताओं को बंधुआ मजदूर की तरह शोषण करते हैं।
3.    हमारे मुवक्कित 4,5,6 इस धंधे में मुख्य मुनाफा कमाते हैं।
4.    हमारे मुवक्किलों ने अरविन्द सिंह की हत्या की, जबकि उनकी मृत्यु बीमारी से हुयी।
5.    मुवक्किलों की संस्था को एक अंजाने/काल्पनिक संगठन क्रांतिकारी कम्युनिष्ट लोग से जोड़ा।
6.    हमारे मुवक्किलों को आपराधिक गिरोह कहा, जनता की सम्पत्ति लूटने का आरोप लगाया और एक युवा व्यक्ति को अपने पिता से धन उगाही करवाया ताकि ये लोग ऐश का जीवन जी सकें।
7.    परिवारवाद का आरोप लगाया।
8.    अपने से अलग विचार वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे पुलिस केस कराये।
9.    आम जनता की सम्पति लूटने, धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया।
10.    पैसा इकट्ठा करने के उद्देश्य से कार्यकर्ताओं के साथ झूठ बोला गया, धोखाधड़ी की गयी और विश्वासघात किया।
11.    धन उगाही के लिये युवाओं को उनके माता पिता के खिलाफ उकसाया गया। एन0जी0ओ0, सरकारी संस्थाओं और पूंजीपतियों से भारी पैमाने पर पैसा लिया गया।
12.    कार्य कर्ताओं को नौकर समझा गया और उन्हें सेल्समैन बनाया गया।
13.    संस्थाओं को बदनाम करने के उद्देश्य से उन्हें एक काल्पनिक संगठन ‘क्रांतिकारी कम्यूनिष्ट लीग’ से जुड़ा बताया।
14.    कार्यकर्ताओं को दम घोंटू माहौल में अवसादग्रस्त बनाने का आरोप।
15.    अवैतनिक कर्मचारियों द्वारा धनउगाही करने का आरोप।
16.    अरविन्द सिंह के नाम पर धन उगाही का आरोप।
17.    लोगों के घर और संपत्ति हड़पने का आरोप।
18.    अरविन्द सिंह, शालिनी, कमला पाण्डे, विश्वनाथ मिश्र की मृत्यु के जिम्मेदार इन लोगों को बताया।
19.    आपराधिक गिरोह संचालित करने का आरोप।

उक्त ब्लागों के सावधानी पूर्ण अध्ययन से यह स्पष्ट है कि हमारे मुवक्किलों 4,5,6 को निजी तौर पर और 1,2,3 सामाजिक संस्थाओं को जानबूझकर क्षति पहुंचाने के ध्येय से झूठी, अनर्गल बातें लिखी गई है। हमारे मुवक्किल जिनकी बहुत अच्छी सामाजिक छवि है, उसे बहुत नुकसान पहुंचा और उन्हें विकास करने और आगे बढ़ने में रूकावट आयी।

प्रतिवादी नं0-1, जो जनज्वार का संपादन करते हैं, चाहते तो इस कुत्सा प्रचार को नियंत्रित कर सकते थे, लेकिन जानबूझकर इस झूठे अनर्गल बातों को प्रचारित किया। हालाकि हमारे मुवक्किलयों की सामाजिक हैसियत बेहिसाब हे, फिर भी यदि बहुत उदारता पूर्वक मूल्यांकन किया जाय तो यह प्रति मुवक्किल 25 लाख रूपये होती है। प्रतिवादी नं0 1 से 4 तक इस कुत्सा प्रचार में शामिल है, वे इस नोटिस को पाने के एक सप्ताह के भीतर इस रकम का भुगतान करें, नहीं तो कोर्ट के माध्यम से वसूली की जायेगी, और उन्हें उचित सजा दिलवाया जायेगा।
    
इस रकम के भुगतान के साथ प्रतिवादीगण कुत्सा प्रचार का काम तुरन्त बंद करें और हमारे मुवक्किलों से क्षमा याचना करें, और उसे समाचार पत्रों में प्रकाशित करवायें, नहीं तो हम न्यायालय में इस क्षतिपूर्ति के लिये जायेंगे और प्रतिवादियों को दण्डित करवायेंगे।

भवदीय

(अनूप गुरूनानी)
एडवोकेट,लखनऊ

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