भड़ास को कुछ ऐसे तथ्य पता चले हैं जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में तैनात एक मंत्री के नाम पर उनके अधीनस्थ लोग लगभग सौ करोड़ रुपये उगाही का टारगेट बनाए हुए हैं और इस टारगेट को पूरा करने के लिए पैसा वसूलो अभियान पर कई लोग निकल चुके हैं.
एक मंत्रालय से संबद्ध वेंडरों, सप्लायरों, रिसीवरों, ठेकेदारों, अधीनस्थ अन्य कंपनियों से उगाही का यह टारगेट है. मंत्री जी इस मंत्रालय के सर्वेसर्वा हैं और उनका पीएस इस पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहा है. मंत्री जी के अधीन की कई सरकारी कंपनियों के मुखिया अफसरों को कह दिया गया है कि आगामी चुनाव और कांग्रेस का बड़ा सा भार प्रभार मंत्री जी को मिलने के कारण ढेर सारा पैसा चाहिए, इसलिए सबको मिल जुटकर यह टारगेट हासिल करना है.
मध्य भारत के एक वेंडर ने उगाही अभियान में शामिल छत्तीसगढ़ के एक शख्स का काफी कुछ प्रमाण अपने पास रख लिया है. उनसे पता चलता है कि उगाही अभियान जोरशोर से चल रहा है और इसे क्रियान्वित करने के लिए मंत्री के चेले देश के कोने-कोने में घूम रहे हैं. हाल-फिलहाल एक मंत्री जी अपने पीएस के फोन काल डिटेल के कारण सीबीआई के जाल में फंसे और उससे यह साबित भी हुआ कि मंत्री के बिहाफ पर उनका पीएस सारा गोरखधंधा संभालता है.
सूत्रों का कहना है कि देर-सबेर इस पैसा उगाहो अभियान के भी ऐसे प्रमाण सार्वजनिक हो जाएंगे जिसके जरिए पता चल जाएगा कि इस देश और इस देश की कंपनियों, जनता के पैसे को कैसे लूटा-लुटाया जाता है. भड़ास इस प्रकरण से जुड़े कई तथ्य व डाक्यूमेंट्स की जांच कर रहा है. शीघ्र ही पूरी कहानी असली नाम पते के साथ सार्वजनिक की जाएगी. फिलहाल संबंधित आरोपी जनों को पूरे मसले पर उनका पक्ष जानने के लिए मेल कर दिया गया है.
साथ ही, कुछ लोग इस मामले को सीबीआई में ले जाने की भी तैयारी कर रहे हैं. हालांकि सीबीआई काफी कुछ केंद्र सरकार के निर्देश पर कार्य करती है, इसलिए यह उम्मीद कम है कि सीबीआई खुद की पहल पर मंत्री के खास लोगों के गिरेबान पर हाथ डालेगी, लेकिन सीबीआई के संज्ञान में मामला आ जाने से प्रकरण काफी कुछ आन रिकार्ड आ सकता है और फिर कोर्ट का रास्ता अपनाया जा सकता है. इस प्रकरण की कड़ियों के तार जोड़ रहे लोगों का कहना है कि मसला अब काफी नाजुक मोड़ पर जा चुका है और संभव है कि चुनाव से पहले ही मंत्री जी अपने लोगों की करनी के कारण कठघरे में घिर जाएं.





