एक ही बिंदु पर गृह विभाग और डीजी ऑफिस से मांगी गयी सूचना में दिये गए उत्तर से उत्तर प्रदेश में आरटीआई को लेकर विभागों का रवैया स्पष्ट हो जाता है. आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने 02 नवंबर 2004 को हुई मुख्यमंत्री समीक्षा से सम्बंधित कुछ सूचनाएं उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग और डीजीपी कार्यालय से माँगा. सूचना यह मांगी गयी थी यह समीक्षा बैठकें कब-कब और कहाँ आयोजित की गयीं, इनमे किन-किन आईपीएस अधिकारियों को दंड या चेतावनी दी गयी आदि.
इस पर डीजीपी कार्यालय ने दिनांक 21 जून 2013 को यह पत्र धारा 6(3) आरटीआई एक्ट में गृह विभाग को अंतरित कर दिया और कहा कि ये सूचनाएँ गृह विभाग से सम्बंधित होने के कारण वहीँ मिलेंगी. मजेदार बात यह है कि लगभग मिलती-जुलती सूचनाओं पर गृह विभाग ने दिनांक 28 जून को ठाकुर का एक दूसरा पत्र डीजीपी कार्यालय यह कहते हुए अंतरित किया कि ये सूचनाएँ डीजीपी कार्यालय से सम्बंधित हैं. इस तरह एक ही सूचना में गृह विभाग और डीजीपी कार्यालय एक दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं जबकि यह सूचना दोनों जगह उपलब्ध होनी चाहिए. यह स्थिति वास्तव में निंदनीय है.





