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एक हजार एजुकेशन चैनलों के लांच होने का रास्‍ता साफ

नई दिल्ली : देश में सैटलाइट के जरिए एजुकेशनल चैनलों को शुरू करने का जो सपना केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बतौर मानव संसाधन और विकास मंत्री (एचआरडी) देखा था, अब उसे उन्होंने बतौर कानून मंत्री पूरा कर दिखाया है। गौरतलब है कि पहले यह मामला सूचना और प्रसारण मंत्रालय (आईएंडबी) की तरफ से उठाई गई आपत्तियों की वजह से लटक गया था।

नई दिल्ली : देश में सैटलाइट के जरिए एजुकेशनल चैनलों को शुरू करने का जो सपना केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बतौर मानव संसाधन और विकास मंत्री (एचआरडी) देखा था, अब उसे उन्होंने बतौर कानून मंत्री पूरा कर दिखाया है। गौरतलब है कि पहले यह मामला सूचना और प्रसारण मंत्रालय (आईएंडबी) की तरफ से उठाई गई आपत्तियों की वजह से लटक गया था।

रास्ता हुआ साफ : अब कानून मंत्रालय ने एचआरडी मिनिस्ट्री के सैटलाइट कम्यूनिकेशन पॉलिसी के तहत अपने एजुकेशनल चैनल शुरू करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इससे अब देश में एचआरडी मिनिस्ट्री के तकरीबन एक हजार एजुकेशनल चैनलों की शुरुआत का रास्ता साफ हो गया है। एचआरडी मिनिस्ट्री फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 50 एजुकेशनल चैनलों का काम शुरू करना चाहता है।

क्यों लटका था : तकरीबन दो साल पहले एचआरडी मिनिस्ट्री की इस पहल पर आईएंडबी मिनिस्ट्री ने आपत्ति जता दी थी। आईएंडबी मिनिस्ट्री की दलील थी कि वह डीटीएच पॉलिसी में बताए कंपनी एक्ट के तहत सिर्फ किसी रजिस्टर्ड कंपनी को ही चैनल शुरू करने की मंजूरी दे सकती है। एचआरडी मिनिस्ट्री उसके दायरे में नहीं आती, इसलिए उसे इसकी मंजूरी नहीं दी जा सकती।

यूं हुई सुलह : इस पर दोनों मंत्रालयों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मामला पीएमओ के दरबार तक पहुंच गया। पीएमओ के दखल के बाद यह पूरा मामला स्पेस, आईटी, आईएंडबी और फाइनैंस मिनिस्ट्री के सचिवों की एक कमिटी को सौंप दिया गया। कमिटी ने पूरे मामले पर गौर करके अपनी सिफारिश दी कि कानून मंत्रालय ही इस मामले में अंतिम राय बनाए। कानून मंत्रालय द्वारा इस पूरे विवाद पर अपनी राय साफ कर देने के बाद एचआरडी मिनिस्ट्री अब इसे फिर से सचिवों की कमिटी के सामने रखने जा रही है। मिनिस्टी के सूत्रों ने बताया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि कमिटी इस पर अपना अंतिम फैसला ले सकें। (नभाटा)

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