खबर है कि बस्ती में अमर उजाला ब्यूरो प्रभारी बनकर लगभग 6 माह तक अपनी सेवाएं देने वाले वीरेन्द्र पांडेय ने नये ब्यूरो प्रभारी के आते ही पद से इस्तीफा दे दिया है। धीरज पांडे महाराजगंज जनपद से अवमुक्त होकर बस्ती जनपद के लिये आये हैं। अमर उजाला की बस्ती में पोजिशन खराब होती चली जा रही है। फिलहाल वीरेन्द्र पांडेय का अमर उजाला छोड़ना पत्रकारों के चर्चा का विषय बन गया है।
गौरतलब है कि वीरेन्द्र पांडेय पिछले 6 से 7 सालों से अमर उजाला में बतौर क्राईम रिपोर्टर काम करते रहे हैं। पिछले साल 2012 में ब्यूरो प्रभारी पुष्कर पांडेय का सोनभद्र तबादला होने के बाद संस्थान ने वीरेन्द्र पांडेय को बस्ती में अमर उजाला ब्यूरो प्रभारी बना दिया था। मगर संस्थान ने वीरेन्द्र पांडेय का उस वक्त झटका दे दिया, जब महाराजगंज जिले के धीरज पांडेय को बस्ती में अमर उजाला प्रभारी बना कर भेज दिया। धीरज पांडेय के आते ही कुछ तथाकथित पत्रकारों ने उन्हें अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया। यही बात पूर्व ब्यूरो प्रभारी वीरेन्द्र पांडेय को खटकने लगी।
कई बार वीरेन्द्र ने इसका धीरज पांडेय से विरोध भी किया, मगर इस चंगुल में फंस चुके अमर उजाला ब्यूरो धीरज पांडेय वापस होने को तैयार नहीं हुये। नतीजा रहा कि वीरेन्द्र पांडेय ने ऐलान किया कि एक म्यान में दो तलवारें नहीं हो सकतीं। काफी गहमा गहमी के बाद आखिरकार वीरेन्द्र पांडेय ने अमर उजाला प्रबंधन को अलविदा कह दिया। इसके बाद तथाकथित पत्रकारों की चांदी हो गई और अब वे खुश हैं कि अब आफिस में उनका विरोध करने वाला कोई नहीं। वे किसी भी तरह के काम को करने के लिये स्वतंत्र हैं। मगर संस्थान वीरेन्द्र पांडेय जैसे लगनशील और कर्मठ पत्रकार को दरकिनार कर अपना ही नुकसान कर लिया।
हालत यह है कि अमर उजाला बस्ती में इस वक्त क्राईम की रिपोर्टिंग करने वाला कोई नहीं है और फोटोग्राफर या फिर अन्य रिपोर्टरों से क्राईम की खबरें कवरेज करवाई जा रही है। पहले क्राईम की खबरों के मामले में नम्बर एक रहने वाला अमर उजाला अब धीरे धीरे क्राईम की खबरों के मामले में नीचे खिसक रहा है। बहरहाल खबर है कि वीरेन्द्र पांडेय अपने अपने हुनर के बल पर जल्द ही एक बड़े संस्थान के साथ काम करने की तैयारी कर रहे हैं।
बस्ती से सतीश श्रीवास्तव की रिपोर्ट.





