Ashish Maharishi : अजीब स्थिति है। पत्रकारिता की सबसे अधिक चिंता वो लोग कर रहे हैं जो ऊपर से लेकर नीचे तक करप्शन में घिरे हुए हैं। नैतिकता के पैमाने पर जो कहीं भी खरे नहीं उतरते हैं, उन्हें सबसे अधिक चिंता सता रही है।
पुरूष पत्रकार को देखते ही जिनके मुंह बन जाते हैं और महिला पत्रकारों से मिलते ही जिनकी लार टपकने लगती है, उन्हें पत्रकारिता का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। जनसंपर्क और दलाली कर अपनी दुकान चलाने वाले अब यदि पत्रकारिता की चिंता करने लगे तो हो गया सत्यानाश। हर दौर में ऐसे लोग आते हैं। उस दौर में भी आए थे और इस दौर में भी आए हैं।
युवा पत्रकार आशीष महर्षि के एफबी वॉल से साभार.





