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एक साल का हुआ ‘दलित दस्तक’, संपादक अशोक दास को सबने सराहा

दलित मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाली दलित दस्तक पत्रिका के सफलता पूर्वक एक साल पूरा होने पर दिल्ली के गांधी पीस प्रतिष्ठान में हुए मंथन कार्यक्रम में पत्रिका को और भी बेहतर बनाने की रूप रेखा तैयार की गई। दिल्ली से प्रकाशित और 12 राज्यों में प्रसारित दलित दस्तक के मंथन कार्यक्रम में जेएनयू के प्रो. विवेक कुमार, इंडिया टुडे के कार्यकारी संपादक दिलीप मंडल, समयक प्रकाशन के शांति स्वरूप बौद्ध, लेखक आनंद श्रीकृष्ण, जयप्रकाश कर्दम, सामाजिक चिंतक देवमणि भारतीय, समाजसेवी और लेखिका अनीता भारती के साथ की शिक्षिका पूजा राय ने भी कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और अपने विचार रखे।

दलित मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाली दलित दस्तक पत्रिका के सफलता पूर्वक एक साल पूरा होने पर दिल्ली के गांधी पीस प्रतिष्ठान में हुए मंथन कार्यक्रम में पत्रिका को और भी बेहतर बनाने की रूप रेखा तैयार की गई। दिल्ली से प्रकाशित और 12 राज्यों में प्रसारित दलित दस्तक के मंथन कार्यक्रम में जेएनयू के प्रो. विवेक कुमार, इंडिया टुडे के कार्यकारी संपादक दिलीप मंडल, समयक प्रकाशन के शांति स्वरूप बौद्ध, लेखक आनंद श्रीकृष्ण, जयप्रकाश कर्दम, सामाजिक चिंतक देवमणि भारतीय, समाजसेवी और लेखिका अनीता भारती के साथ की शिक्षिका पूजा राय ने भी कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में कई अन्य समाजसेवी संगठन के कार्यकर्ता, पत्रकार और साहित्यकारों ने भी हिस्सा लिया। मंथन कार्यक्रम में संपादक अशोक दास द्वारा पत्रिका की एक साल की उपलब्धियों और चुनौतियों को लेकर तैयार की गई एक डाक्यूमेंट्री भी दिखाई गई जो पत्रिका में अब तक की छपी प्रमुख और बड़ी ख़बरों की एक झलक थी। साथ ही डाक्यूमेंट्री में यह भी दिखाया गया कि आईएमसी से निकलने वाला एक दलित छात्र अशोक दास अब समाज को ऐसी रौशनी दिखा रहा है जिस पर दलित पत्रकारों, और बहुसंख्यक समाज को गर्व है।

डाक्यूमेंट्री में प्रगति मैदान में लगे दलित दस्तक स्टॉल को लेकर लोकसभा टीवी पर प्रसारित ख़बर और अशोक दास के दिए गए संदेश को भी प्रमुखता से दिखाया गया है। दलित सरोकारों को हर कीमत पर उठाने और दरकिनार कर दिए गए समाज को सचेत करने की कोशिश में जुटी पत्रिका के संपादक अशोक दास का कहना है कि यह पत्रिका उस समाज की है जो अपनी परेशानियों को लेकर मीडिया से रूबरू हो पाना तो दूर मीडिया तक पहुंचने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता है।

संपादक अशोक दास के इस साहसिक कार्य को पत्रकारों, समाजसेवी संगठनों, जेएनयू प्रो. विवेक कुमार और शांति स्वरूप बौद्ध समेत हजारों लोगों ने सराहा और पत्रिका के कुशल संचालन के लिए सहयोग का वादा किया है। इंडिया टुडे के कार्यकारी संपादक दिलीप मंडल ने पत्रिका के अंग्रेजी संस्करण निकाले जाने की जरूरत बताई जिससे विदेशों में रह रहे लोगों तक भी संदेश पहुंच सके और लोग वास्तविक हालात से वाकिब हों। दलित दस्तक पत्रिका के संपादक अशोक दास का कहना है कि हमारा मकसद समाज में दरकिनार कर दिए गए लोगों को जागरूक करना और उनको अपने अधिकारों के प्रति सजग करना है। दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका अब न केवल देश प्रदेश के बुक स्टालों पर मिलेगी बल्कि रेलवे के एएच व्हीलर एंड कंपनी से करार हो जाने की वजह से कई रेलवे स्टेशनों पर भी उपलब्ध रहेगी।  

प्रेषक

अखिलेश कृष्ण मोहन

प्रेस विज्ञप्ति

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