मुझे याद है वो दिन जब मै एक टीवी चैनल के लिए अखिलेश यादव का पहला लोकसभा चुनाव कवर करने कन्नौज गया था और अखिलेश यादव कैमरा फैस करने में शर्मा रहे थे. धर्मेन्द्र यादव ने मेरे से कहा कि सैफ़ी भाई आप ही कुछ समझाए. मैं अखिलेश यादव को अच्छी तरह समझा रहा था कि मैं आपसे ये सवाल पूछुंगा और आप ये जवाब दीजियेगा. ये सिलसिला अखिलेश यादव के निजी कक्ष में काफी देर तक चला और हमारा कैमरामैन ये सब रिकॉर्ड करता रहा, जो मुझे पता नहीं था.
बाद में अखिलेश यादव मुझे अपने साथ रैली में लेकर चल दिए, पूरे काफिले के साथ. धर्मेन्द्र यादव बहुत खुश थे कि भय्या जी का शानदार कवरेज मैंने किया. रेकार्डिंग टैप मैंने बस के ज़रिये दिल्ली भेज दी. मैं भी खुश था और अखिलेश यादव-धर्मेन्द्र यादव भी. मगर मुझे मेरे एडिटर ने इसकी सजा दी क्योंक़ि मैंने नेता जी के बेटे को समझाया कि टीवी साक्षात्कार में क्या ध्यान रखना है. जुर्म ये था कि क्यों मदद क़ी. क्यों समझाया अखिलेश यादव को.
मुझे राजनीतिक कवरेज से न केवल अलग कर दिया गया बल्कि मेरा कैरियर राजनीतिक कवरेज में न बने, इसका भी पूरा इंतज़ाम हुआ. मेरी जगह सुकेश रंजन को प्रमोट किया गया. मेरा राजनीतिक पत्रकार बनने का सपना टूट गया और मैं एक क्राइम रिपोर्टर बन गया. आज ये सिर्फ मेरी एक स्मृति है. न एडिटर साहब को याद होगा. न अखिलेश यादव-धर्मेन्द्र यादव को क्योंकि वो सीधा सादा और शर्मीला नौजवान नेता अखिलेश यादव अब मुख्यमंत्री है और दूसरा धर्मेन्द्र यादव सांसद. एडिटर साहब आज भी मेरे पूजनीय हैं. मेरे गुरु हैं. उनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है.
मगर नए पत्रकारों को आगे बढाने का मुझे जुनून है और नए लोगों क़ी मदद के लिए मैं हर संभव प्रयास करता हूँ, क्योंकि मेरी मदद करने वाले ऐसे लोग थे जिनकी मैंने सपने में भी कल्पना नहीं कि थी और मुझे धोखा उन्हीं लोगो से मिला जिन पर मैं भरोसा करता था. मगर आज भी मेरा मूल मंत्र है नेकी करता जा, अल्लाह भला करेगा और अपने भले के लिए किसी क़ी रोज़ी रोटी से छेड़खानी मत करो क्योकि ये अल्लाह का विभाग है. आज में खुश हूँ अपनी मीडिया कंपनी को तरक्की करते देख रहा हूँ..शुक्र है अल्लाह का!
पत्रकार सलीम सैफी Saleem Saifi के फेसबुक वॉल से.






