Qamar Waheed Naqvi : एस. पी. सिंह की बरसी पर आयोजित सेमिनार में जाना हुआ. मीडिया की मौजूदा दयनीय स्थिति और पत्रकारीय मूल्यों के 'घोर पतन' पर गरमागरम बहस हुई. सम्पादकों को इस पतन के लिए ख़ूब लतियाया गया. इसके बाद कुछ लोगों को उनके संघर्ष/ योगदान के लिए 'सम्मानित' भी किया गया. सेमिनार की समाप्ति के बाद संयोग से मेरी बातचीत उनमें से एक सज्जन से हुई, जिन्हें 'सम्मानित' किया गया था.
वह किसी शीघ्र लाँच हो रहे चैनल में वाइस-प्रेसीडेंट बने हैं. पूछने पर पता चला कि उनके चैनल के मालिक का नाम सुधाकर शेट्टी है. आपकी याद्दाश्त को ताज़ा कर दें कि सुधाकर शेट्टी किसी ज़माने में मुम्बई का कुख्यात दीपा बार चलाता था, जिसकी करोड़पति बार बाला तरन्नुम के उन दिनों बड़े चर्चे हुआ करते थे और वह क्रिकेट सट्टेबाज़ी के मामले में गिरफ़्तार भी हुई थी. सट्टेबाज़ी के इस मामले के अलावा मुम्बई के अंडरवर्ल्ड समेत कई संदिग्ध कारनामों में सुधाकर शेट्टी का नाम आता रहा है.
भाई, मीडिया के नैतिक पतन पर आँसू भी बहाओगे और ऐसे संदिग्ध नामवाले व्यक्तियों से जुड़े लोगों का सम्मान भी करोगे? दीपा बार के पूर्व संचालक के न्यूज़ चैनल से आपको किन नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की उम्मीद है? पता नहीं क्या मजबूरी थी, लेकिन नैतिकता की दुहाई देनेवालों के इस दोहरेपन से बहुत हैरान हूँ. सुधाकर शेट्टी व उसके न्यूज़ चैनल पर इंडियन एक्सप्रेस की 28 अप्रैल 2013 की यह रिपोर्ट विस्तार से जानकारी देती है:
वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी के फेसबुक वॉल से.





