Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

यूपी पुलिस ने भी प्रमोशन-पोस्टिंग के लिए कइयों की हत्या की

: इशरत जहाँ बनाम पुलिस एनकाउंटर : इशरत जहां मामले में बिना तथ्यों का छिद्रान्वेषण किये मेरी व्यक्तिगत राय यही है कि यदि कोई भी व्यक्ति (जिसमे जाहिरा तौर पर अफसर भी शामिल हैं) चाहे वे सरकार के किसी भी विभाग का अंग हों, को अवश्य दण्डित किया जाना चाहिए, यदि साक्ष्य ऐसा कहते हों. मात्र अपनी आधिकारिक स्थिति के कारण किसी को भी कोई भी लाभ दिया जाना कदापि उचित नहीं माना जाएगा.

: इशरत जहाँ बनाम पुलिस एनकाउंटर : इशरत जहां मामले में बिना तथ्यों का छिद्रान्वेषण किये मेरी व्यक्तिगत राय यही है कि यदि कोई भी व्यक्ति (जिसमे जाहिरा तौर पर अफसर भी शामिल हैं) चाहे वे सरकार के किसी भी विभाग का अंग हों, को अवश्य दण्डित किया जाना चाहिए, यदि साक्ष्य ऐसा कहते हों. मात्र अपनी आधिकारिक स्थिति के कारण किसी को भी कोई भी लाभ दिया जाना कदापि उचित नहीं माना जाएगा.

इशरत जहाँ मामले ने एक गंभीर प्रश्न यह खड़ा कर दिया कि ऐसा क्यों होता है कि हमारे देश में कई तफ्तीशें जल्द ही खेमेबंदी में परिवर्तित हो जाती हैं जिस के कारण देश की सर्वोच्च अन्वेषण ईकाई की विवेचना पर भी नाना प्रकार के वाद-विवाद शुरू हो जाते हैं. कहावत है कि हमें सिर्फ ईमानदार होना नहीं चाहिए बल्कि ईमानदार दिखना भी चाहिए. सभी अन्वेषण ईकाईओं के लिए यह ब्रह्मवाक्य हो ताकि ना सिर्फ इन ईकाईओं की निष्पक्षता हो बल्कि वह लगातार नज़र भी आये. इशरत जहाँ मामले ने एक बार फिर हमें इस ओर सोचने को मजबूर कर दिया है.

इशरत जहाँ केस पर कोई टिप्पणी किये बिना मैं यह कहना चाहूँगा कि एक अंदर के आदमी के रूप में मैं इस बात को भली-भाँति जानता हूँ कि यहाँ तक कि उत्तर प्रदेश पुलिस में भी तमाम ऐसे इनकाउंटर रचे गए जिसमे इनकाउंटर रचने वाले पुलिस अधिकारी का एकमात्र ध्येय व्यक्तिगत हित था- चाहे वह मेडल के रूप में, प्रोमोशन, पोस्टिंग या मात्र अपने नंबर बढाने की चाहत. यह बात घृणित और दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन सच भी.

मैं हमेशा मोबाइल फोन के आगमन को फर्जी पुलिस मुठभेड़ पर रोक लगाने का सबसे बड़ा कारक समझता हूँ. फोन की बातचीत की रिकॉर्डिंग होने और फोन का टावर लोकेशन ज्ञात हो जाने की संभावना ने तमाम वरिष्ठ अधिकारियों को काफी चौंकन्ना कर दिया है और वे अब इनकाउंटर के बारे में कोई भी निर्देश देने से बहुत बचते हैं. हाँ, भारत में मोबाइल सुविधा की बढोत्तरी और पुलिस एनकाउंटर दर में कमी के बीच सीधा रिश्ता दिखा पड़ता है. सवाल है- ऐसा क्यों?

और इशरत जहाँ इनकाउंटर के सन्दर्भ में मेरी आखिरी बात यह है कि काफी मनन और चिंतन के बाद मैं आज इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि किसी भी स्थिति में किसी के भी खिलाफ कभी भी "रचित पुलिस इनकाउंटर" चाहे वह आदमी आतंकवादी हो, भयावह अपराधी हो, नक्सल हो या अन्य कोई हो, जायज नहीं ठहराया जा सकता.  कारण बहुत स्पष्ट है- यदि आज तुम किसी पुलिस वाले को यह छूट दे दोगे कि वह जरूरत के हिसाब से इनकाउंटर कर दे तो कल वह किसी भी कारण (राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, प्रशासनिक या कोई अन्य) से तुम्हारे भाई या बहन का भी ऐसा ही इनकाउंटर कर सकता है.

 इसका मतलब यह नहीं कि मैं सजा-ए-मौत का भी विरोध कर रहा हूँ. सम्पूर्ण न्यायिक प्रक्रिया के बाद किसी को दिया गया मृत्युदंड पुलिस द्वारा मौके पर जीवन और मृत्यु के सम्बन्ध में अपने विवेक अथवा अपनी इच्छा से लिए गए निर्णय से पूर्णतया अलग है और समाज की जरूरत है.

अतः आज के दिन मेरा यह स्पष्ट विचार है कि किसी भी दशा में फर्जी मुठभेड़ ना हों, चाहे उस क्षण उसकी कितनी भी जरूरत महसूस क्यों ना हो रही हो. मृत्युदंड सहित सभी प्रकार की सजा का अधिकार और कार्य न्यायपालिका का ही रहने देना उचित है.

लेखक अमिताभ ठाकुर यूपी कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और इन दिनों लखनऊ में पदस्थ हैं. अमिताभ ठाकुर जनपक्षधर पुलिसिंग के लिए सतत संघर्षरत हैं. अपने बेबाक लेखन और साफगोई भरे बयानों के लिए चर्चित हैं. यू

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...