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लखनऊ का ‘निष्पक्ष प्रतिदिन’ अखबार पीसीएस हरिशंकर पांडेय को बेइमान बताने पर तुला

आजकल कौन बेइमान है और कौन इमानदार, यह पता करना बेहद मुश्किल है. जिस हरिशंकर पांडेय को ईमानदार बताया जा रहा है और उनके पक्ष में ढेर सारे लोग उठ खड़े हुए हैं, उन्हें बेइमान साबित करने पर तुल गया है एक अखबार. लखनऊ से प्रकाशित निष्पक्ष प्रतिदिन में इसके ब्यूरो चीफ मनीष श्रीवास्तव की एक स्टोरी छपी है, जिसमें बताया गया है कि हरिशंकर पांडेय भी कम बड़े कलाकार नहीं हैं. आइए, पढ़ें मनीष की रिपोर्ट. -एडिटर, भड़ास4मीडिया

आजकल कौन बेइमान है और कौन इमानदार, यह पता करना बेहद मुश्किल है. जिस हरिशंकर पांडेय को ईमानदार बताया जा रहा है और उनके पक्ष में ढेर सारे लोग उठ खड़े हुए हैं, उन्हें बेइमान साबित करने पर तुल गया है एक अखबार. लखनऊ से प्रकाशित निष्पक्ष प्रतिदिन में इसके ब्यूरो चीफ मनीष श्रीवास्तव की एक स्टोरी छपी है, जिसमें बताया गया है कि हरिशंकर पांडेय भी कम बड़े कलाकार नहीं हैं. आइए, पढ़ें मनीष की रिपोर्ट. -एडिटर, भड़ास4मीडिया

ईमानदारी की नौटंकी में माहिर हैं पीसीएस हरिशंकर पाण्डेय

मनीष श्रीवास्तव

लखनऊ। पीसीएस हरिशंकर पाण्डेय। यह अफसर फिलहाल सुर्खियों में है। आरईएस के दागी निदेशक उमाशंकर के घोटालों का खुलासा करने से चर्चा में आए पाण्डेय ने खुद को घिरता देख अपने पद से इस्तीफा क्या दिया, पूरी नौकरशाही समेत समाज के विभिन्न वर्गों में यह हड़कंप मच गया कि एक ईमानदार अफसर होना सबसे बड़ा गुनाह है। चोर-चोर मौसेरे भाई की तर्ज पर आपस में लड़ रहे इन भ्रष्ट अफसरों के चेहरे से ईमानदारी का नकाब हटाना बेहद जरूरी है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

रही बात हरिशंकर पाण्डेय की तो इस अफसर का पूरा परिवार भ्रष्टाचार में सिर से पैर तक डूबा है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में निदेशक उमाशंकर ने अरबों के घोटालों को अंजाम दिया है। मौजूदा प्रमुख सचिव आरईएस अशोक कुमार व दागी प्रमुख सचिव नियुक्ति राजीव कुमार उमाशंकर को बचाने का प्रयास कर रहे है। इसलिए आरईएस में अरबों के घोटालों की जांच सीबीआई को  सौंप देना चाहिए।

9.12.2009 से 22.3.2010 और 10.02.2011 से 18.04.2011 के बीच हरिशंकर पाण्डेय उद्यान निदेशालय में बतौर निदेशक तैनात थे। इस दौरान पाण्डेय ने बनारस, इलाहाबाद, फैजाबाद, आजमगढ़, मिर्जापुर, गोरखपुर, बरेली समेत कई जिलों का निरीक्षण किया। विभागीय अफसरों का दबी जुबान से कहना है कि  होटल में रूककर पाण्डेय डीएचओ के दस्तावेजों को जबरदस्ती रखकर धन उगाही तक करते थे।

निष्पक्ष प्रतिदिन ने अफसरों की रिकार्डिंग के आधार पर धनउगाही की बातचीत का खुलासा भी पहले किया था। जिसमें दो बड़े विभागीय अफसर हरिशंकर पाण्डेय पर गंभीर आरोप लगा रहे थे।  यही नहीं अपने एक करीबी एलआईसी एजेंट के खातिर अधीनस्थ अफसरों से 50-50 हजार का जीवन बीमा तक कराने की बात सामने आ रही है। जिसकी जांच भी करायी जानी चाहिए। गोमतीनगर में पाण्डेय का करोड़ों का आलीशान घर है।

उद्यान विभाग में 2011 में हरिशकंर पाण्डेय ने करोड़ों के गबन में फंसे लेखाकर सुशील कुमार सिंह जैसे तमाम भ्रष्टों को  बहाल तक कराया था। यही नहीं भ्रष्ट डीएचओ हमीरपुर सुरेश कुमार गुप्ता से पहले आहरण वितरण अधिकार लिया। उसके बाद  वापस भी कर दिया। यहां भी पाण्डेय की सत्यनिष्ठा सवालों के घेरे में है। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि पैसा लेकर भ्रष्टों पर मेहरबानी दिखायी गयी है। उद्यान विभाग में पाण्डेय के कारनामें जगजाहिर है।

अधीनस्थ उद्यान सेवा संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने हरिशंकर पाण्डेय की काली कारतूतों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तबादले के लिए मार्च 2011 में 11 दिनों तक हड़ताल करके मुख्यमंत्री को कई पत्र भेजे थे। यहीं नहीं पीसीएस हरिशंकर पाण्डेय के घोटालों की सतर्कता जांचे 2005 से नियुक्ति विभाग में दबी पड़ी होने की बात भी सामने आ रही है। लेकिन हरिशंकर के आईएएस भाई विजय शकंर पाण्डेय के दबाव  में जांचें ठंडे बस्ते में पड़ी हुयी है। इन बातों की सच्चाई भी तभी सामने आयेगी जब नियुक्ति विभाग गहराई से इन जांचों को अंतिम मुकाम तक पहुंचायेगा।  

खास बात यह है कि भाई आईएएस विजय शंकर पाण्डेय भी कम  शातिर खिलाड़ी नहीं है। कताई मिल संघ में करीब 1154 करोड़ के घोटाले की सीबीआई जांच के घेरे में पाण्डेय  हैं। हालांकि सीबीआई ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सिर्फ यहीं नहीं विजय शंकर पाण्डेय के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन में प्रमुख सचिव रहते सतर्कता जांच शुरू तो हुयी, उसके बाद उसका अता पता नहीं है।

आईएएस विजय शंकर पाण्डेय के कुख्यात कर चोर हसन अली से बेहद करीबी रिश्ते होने की बात भी मायावती सरकार के दौरान सामने आयी थी। पाण्डेय के ऊपर अपनी संस्था के जरिये  सुप्रीम कोर्ट में गलत शपथ पत्र तक देने का आरोप है।  जिसकी जांच अभी तक चल रही है। मायावती सरकार में विजय शंकर पाण्डेय अपर कैबिनेट सचिव तक बन गए थे। स्मारक घोटाले समेत सूचना विभाग में भी इस अफसर के कारनामों की व्यापक जांच करायी जायें। तो कई चौकानें वाले खुलासे होना तय हैं।  

केंद्रीय राजस्व सचिव ने डीओपीटी व गृह मंत्रालय को आईएएस विजय शंकर पाण्डेय के खिलाफ पत्र भी भेजा है। खैर इसी तरह पीसीएस हरि शंकर पाण्डेय के पीसीएस भाई विनय शंकर पाण्डेय भी कम नहीं है । सिर्फ आगरा विकास प्राधिकरण में सचिव पद की तैनाती की जांच करा ली जाये तो पूरा सच सामने आ जायेगा। फिलहाल जांच के डर से अफसर उत्तराखंड भागने की चर्चा पर्दें के पीछे से जारी है।  यही नहीं ईमानदारी का नकाब पहने हरिशंकर पाण्डेय की पीसीएस बहन कनकलता त्रिपाठी भी  उस्ताद है।

सीबीआई व मुख्यमंत्री को भेजी गयी शिकायत के मुताबिक  इलाहाबाद में आरएफसी के पद पर तैनात रही कनकलता त्रिपाठी ने अपने चेहते संजीव कुमार तत्कालीन जिला खाद्य विपणन अधिकारी के साथ मिलकर संभाग में पीडीएस के तहत आने वाले चावल, गेहूं व चीनी को अवैध रूप से खुले बाजार में बिकवा दिया था। कुंडा, लक्ष्मणपुर केंद्र पर हुयी एफआईआर इसका साक्षात प्रमाण है।

यही नहीं अप्रैल 2009 में गेहूं खरीद योजना में 10 अप्रैल तक भारी मात्रा में गेहूं मंडियों/केन्द्रों पर आने लगा था। सरकारी मूल्य में 150-180 रू प्रति कुंतल का भारी अंतर देख बदनाम केंद्र प्रभारियों के जरिए 900 रु.का गेंहूं सरकार के खाते में 1080 ्रप्रति कुंतल में खरीद करोंड़ों की  काली कमायी को अंजाम दिया था। बदनाम डिपो प्रभारियों का तबादला तक करने में भारी गोलमाल को अंजाम दिया गया खेसारी दाल कांड, क्रेट आपूर्ति  घोटाला, खाद्यान्न घोटाला, लेवी चोरी घोटाला अर्द्ध कुंभ मेला में गेहूं व आटा घोटाला, पीडीएस घोटाला, कस्टम कुटाई हेतु धान आवंटन घोटाला व ट्रांसफरों में अनियमितताओं की जांच गहराई से करायी जाए तो पीसीएस कनकलता त्रिपाठी के तमाम घोटालों का कच्चा-चिट्ठा सामने आ जाएगा।

त्रिपाठी के घोटालों की शिकायत मुख्यमंत्री से लेकर सीबीआई तक से की गयी। लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुयी। आईएएस-पीसीएस भाई बहनों के अलावा हरिशंकर पाण्डेय के न्यायाधीश पिता आरपी पांडे भी कम नहीं थे। भाजपा सरकार में मुरली मनोहर जोशी मानव संसाधन मंत्री थे तो आईएएस विजय शंकर पाण्डेय संयुक्त सचिव तैनात थे। तब इनके न्यायाधीश पिता आरपी पांडे को पेट्रोल पंप आवंटन समिति का सर्वेसर्वा बनाया गया था। जिसमें बड़े पैमाने पर पेट्रोल पंप आवंटन घोटाले का अंजाम दिया गया था। यही नहीं जब यह प्रतापगढ़ समेत तमाम जिलों में न्यायाधीश थे तो इनकी छवि आम जनता के बीच कैसी थी ये किसी भी पुराने शख्स से मालुम किया जा सकता है।

लोगों का तो यहां तक कहना है कि बिना पैसा लिये जज साहब के सामने किसी की दाल नहीं गलती थी। इलाहाबाद में करोड़ों की कोठी भी है। ऐसे में पीसीएस हरिशंकर पाण्डेय द्वारा ईमानदारी  का चोला पहनकर वीआरएस मांगने की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने के साथ इनके परिवार के आईएएस-पीसीएस भाई बहनों की भी उच्चस्तरीय जांच करायी जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

लेखक मनीष श्रीवास्तव निष्पक्ष प्रतिदिन अखबार के लखनऊ ब्यूरो चीफ हैं.

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