Nutan Thakur : क्या कोई सरकारी अफसर किसी गैर-सरकारी व्यक्ति को सरकार से पत्राचार करने से रोक सकता है? हमारे देश के किसी भी क़ानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. लेकिन शायद आईएएस अफसर क़ानून से भी ऊपर होते हैं. तभी तो अपने एक आदेश में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह श्री आर एम श्रीवास्तव ने अपने नोट में मेरे लिए ऐसी टिप्पणी की है.
आरटीआई से प्राप्त सूचना के अनुसार श्री श्रीवास्तव को मेरे द्वारा द्वारा भेजे गए दो पत्र इतने नागवार लगे कि उन्होंने नोटशीट में लिख दिया कि ठाकुर को डीजीपी के माध्यम से परामर्श दे दिया जाए कि वे भविष्य में शासन से पत्राचार नहीं करें. यह अलग बात है कि मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी प्रमुख सचिव गृह की इस बात से सहमत नहीं हुए और उन्होंने नोटशीट में यह लिखा कि इसकी आवश्यकता नहीं है.
दरअसल मैंने अपने पति आईपीएस अमिताभ ठाकुर के सन्दर्भों का हवाला देते हुए मुख्य सचिव को दो पत्र भेजे थे जिनमे शासन स्तर पर आईपीएस अधिकारियों के विभागीय जांच और पदोन्नति में कतिपय गडबडियों की जांच कराने की बात कही थी. जांच की बात तो दूर रही श्री श्रीवास्तव ने मुझे ही अवसादग्रस्त बताते हुए पत्राचार की मनाही तक की बात कह दी, वह भी अपने द्वारा नहीं, डीजीपी द्वारा जबकि ना तो उन्हें और ना ही डीजीपी को ऐसा आदेश करने का कोई विधिक अधिकार है.
नूतन ठाकुर के फेसबुक वॉल से.





