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विदेशी पत्रकारों की याचिका पर कोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली : बसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालती कार्रवाई की कवरेज का अधिकार पाने के लिए विदेशी पत्रकारों द्वारा दायर याचिका पर उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. हाई कोर्ट के जज राजीव शकधर ने पुलिस को जवाब देने के लिए 11 जुलाई तक का समय दिया है.

नई दिल्ली : बसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालती कार्रवाई की कवरेज का अधिकार पाने के लिए विदेशी पत्रकारों द्वारा दायर याचिका पर उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. हाई कोर्ट के जज राजीव शकधर ने पुलिस को जवाब देने के लिए 11 जुलाई तक का समय दिया है.

दिल्ली उच्च न्यायालय में फॉरेन कॉरेसपोंडेंट मीडिया क्लब की अधिवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि मामले में पूर्व में न्यायालय ने बसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म की कवरेज का अधिकार पाने के लिए भारतीय पत्रकारों की ओर से दायर याचिका पर फैसला देते हुए उन्हें केस से संबंधित खबरें प्रकाशित करने का अधिकार प्रदान किया था. उस फैसले में विदेशी मीडिया समूह के पत्रकारों का जिक्र नहीं किया गया था, जिसके चलते पुलिस ने विदेशी पत्रकारों को मामले की कवरेज करने से रोक दिया. लिहाजा, मामले में समानता के आधार पर विदेशी मीडिया से जुड़े पत्रकारों को भी कवरेज का अधिकार दिया जाना चाहिए. क्‍योंकि इन सभी विदेशी पत्रकारों को भारत में केंद्र सरकार की मान्यता मिली हुई है.

मीनाक्षी लेखी की दलील के बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि मौजूदा समय में केस की स्थिति क्या है और उन्हें विदेशी पत्रकारों द्वारा मामले की कवरेज करने पर क्या आपत्ति है? पुलिस ने अदालत को बताया कि देश के बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में अंतिम गवाह की गवाही चल रही है. पुलिस ने विदेशी पत्रकारों को इस मामले से संबंधित खबरें प्रकाशित करने का अधिकार दिए जाने पर अपनी आपत्ति जाहिर की. पुलिस ने कहा कि विदेशी पत्रकार पीड़िता का नाम तक छाप देते हैं. चूंकि उनका मीडिया संस्‍थान विदेश में हैं लिहाजा उन पर भारत का कानून लागू नहीं होता, इसलिए किसी गलत कवरेज की स्थिति में कार्रवाई करना मुश्किल होगा. ऐसे में इन्‍हें कवरेज की अनुमति न दी जाए.

पुलिस की दलील पर अधिवक्ता मीनाक्षी लेखी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि विदेशी पत्रकार पूरी तरह से भारतीय कानून का आदर करते हैं. उन्हें पूर्व के फैसले में दी गई शर्तों के आधार पर केस की कवरेज करने की अनुमति दी जा सकती है. वे कोर्ट द्वारा जारी किसी भी गाइडलाइन का उल्‍लंघन नहीं करेंगे.
 

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