लगता है जैसे भास्कर में छंटनी और खर्चे बचाने का दौर शुरू हो गया है. ताजी सूचना के मुताबिक समूह के हिंदी बिजनेस डेली पेपर ''बिजनेस भास्कर'' का दिल्ली आफिस बंद कर इसे जयपुर शिफ्ट किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में कुछ रिपोर्टर रह जाएंगे. बाकी सारा काम जयपुर से होगा. अखबार प्रिंट होने के लिए दिल्ली आएगा. इस बाबत आदेश जारी होने की खबर है.
बताया जाता है कि भास्कर के डायरेक्टर्स की बैठक में पहले तो बिजनेस भास्कर को बंद करने का निर्णय ले लिया गया था. लेकिन बाद में तीस फीसदी स्टाफ छंटनी और जयपुर में आफिस शिफ्ट करके बेहद सीमित खर्चे में चलाने का बीच का रास्ता निकाला गया. उल्लेखनीय है कि एक जमाने में अमर उजाला अखबार ने भी बिजनेस हिंदी डेली संचालित किया था लेकिन उसे आखिरकार बंद करना पड़ा था.
इस सबके पीछे सारा खेल घाटे और मुनाफे का होता है. अगर मुनाफा होता तो ये लोग अखबार बंद न करते. घाटे के कारण अखबार बंद करने का फैसला ले लेते हैं. इससे जाहिर है कि सारा कुछ बाजार, मुनाफा, पूंजी से तय होता है. पर इन अखबारों का मैनेजमेंट अखबार शुरू करते समय संपादकीय में सरोकार, पत्रकारिता और जनहित की बातें लिखता करता है. इस कारण आम पाठक भी सोचता है कि ये अखबार वगैरह पैसे के लिए नहीं बल्कि देश व समाज हित के लिए निकल रहे हैं.
हाल के दिनों में डीएलए अखबार भी कई जगह से बंद हो रहा है. अमर उजाला से अलग होकर अजय अग्रवाल ने कई जगहों से दोपहर का अखबार डीएलए शुरू किया. पर अब इसे बंद करना पड़ रहा है क्योंकि अखबार घाटे में जा रहा है. खर्चे कम करने की कवायद के तहत बिजनेस भास्कर के तीस फीसदी स्टाफ को प्रबंधन टाटा बाय बाय बोल चुका है. ये लोग नौकरियां के लिए यहां वहां फोन घनघना रहे हैं.
बिजनेस भास्कर का आफिस दिल्ली से जयपुर शिफ्ट कर देने से जमीन, आफिस का खर्च काफी कम हो जाएगा. साथ ही जो स्टाफ होगा, वह अपेक्षाकृत कम सेलरी में काम करेगा. इस तरह बिजनेस भास्कर का दिल्ली एडिशन अब जयपुर से निकलेगा. बिजनेस भास्कर के दिल्ली वाले आरई एसपी सिंह भी जयपुर में बैठेंगे.
ज्ञात हो कि भास्कर प्रबंधन ने इस छंटनी के पहले रसरंग की टीम से करीब 16 लोगों को बाहर कर दिया था और इसके कनाट प्लेस स्थित आफिस को बंद कर दिया था. छंटनी के शिकार 16 लोगों में से कई तो दिल्ली के बाहर या दिल्ली में नौकरी पा गए लेकिन अब भी कई लोग बेरोजगार हैं.
भास्कर से ही एक अन्य सूचना के मुताबिक झारखंड समेत कई राज्यों में स्टेट ब्यूरो भंग कर दिया गया है. एक दो लोगों को छोड़कर बाकी सभी को लोकल टीम का हिस्सा बना दिया गया है. इस कारण कई जगहों पर बड़ी विचित्र स्थिति पैदा हो गई है. ज्यादा उम्र व अनुभव वाले लोग कम उम्र के लोकल टीम के इंचार्ज के अंडर में काम करने को मजबूर हो रहे हैं. माना जा रहा है कि यह कवायद भी छंटनी और नौकरी से निकालने की रणनीति के तहत की गई है. इस सबके पीछे टारगेट खर्च बचाना और स्टाफ कम करना है. भास्कर में इस कदर छंटनी से पत्रकारों के कान खड़े हो गए हैं.





