: दैनिक भास्कर के संपादक डॉ0 रमेश अग्रवाल के गजल संग्रह ‘भीड़ में तनहाइयां’ का विमोचन : दैनिक भास्कर, अजमेर के कार्यकारी संपादक एवं गजलकार डॉ0 रमेश अग्रवाल के गजल संग्रह ‘भीड़ में तनहाइयां’ का विमोचन रविवार को जवाहर रंगमंच पर मासिक पत्रिका ‘अहा जिंदगी’ के संपादक आलोक श्रीवास्तव और राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष वेद व्यास ने किया। डॉ0 अग्रवाल की यह तीसरी पुस्तक है। इससे पहले पत्रकारिता पर दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
‘अहा जिंदगी’ के संपादक आलोक श्रीवास्तव ने डॉ0 अग्रवाल के एक दोहे ‘जो भी था सब कह गए तुलसी और कबीर, करें जुगाली अब सभी, पीटें महज लकीर’ के संदर्भ से अपनी बातों की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा मानकर नहीं चलना चाहिए कि तुलसी और कबीर सब कह गए। जमाने में नित नए बदलाव आ रहे हैं। जीवन में बहुत जटिलताएं आ गई हैं। देश बहुत तेजी से करवट ले रहा है। इसे पकड़ने के लिए नई मौलिकता और व्यापक दृश्टिकोण की दरकार है, जिसकी चिंगारियां डॉ0 अग्रवाल की गजलों और दोहों में नजर आती है।
साहित्य अकादमी अध्यक्ष वेद व्यास ने कहा कि गजलों का ताजा दौर हिन्दी से जुड़ा है। आम आदमी की भाशा में हिन्दी की गजल वर्तमान हालात को बयां करती है तो उनका असर प्रभावी होता है। गजल वो माध्यम है जो किसी भी विशय से पाठक और श्रोता को उसी तरह जोड़ देता है जिस तरह एक चलचित्र किसी विशय से दर्शक को जोड़ता है।
पत्रकार और गजलकार के रिश्ते और अपने गजल संग्रह का जिक्र करते हुए डॉ0 अग्रवाल ने कहा कि भावनाओं की स्याही अखबार में लिखी जाती है तो अर्थ विकृत हो जाता है। सच सामने नहीं आ पाता। व्यवसाय और समाज में सच कह नही पाते। जो बातें पूरी किताब में नही लिखी जा सकती वह शेर में कह दी जाती है। हिरण के अंतिम आर्तनाद में छिपी छटपटाहट और वेदना के रिश्ते की अनुभूतियों की अभिव्यक्ति ‘भीड़ में तनहाइयां’ हैं। इस अवसर पर उन्होंने अपने चुनिंदा शेर और दोहे भी सुनाए। जिनमें खासतौर पर उल्लेखनीय थे, ‘‘घर जले चालीस सुनकर यह खबर मैं खुश हुआ, थी अखबार में मेरे खाली जगह वो भर गई,’ और ‘कल सिनेमाघर में जाकर तालियां पीटी बहुत, आज घर में ही कहानी देख अम्मा डर गई।’
इस अवसर पर गजल गायक गुलशन खान ने ‘भीड़ में तनहाइयां’ की चुनिंदा गजलों की संगीतमय प्रस्तुति भी दी। प्रस्तुति के दौरान ‘था सुकूं बैठा मुंडेर पर उडा किसने दिया, मुश्किलों तुमको मेरे घर का पता किसने दिया,’ ‘तब तलक मकसद कोई दिखता नहीं आदमी से आदमी मिलता नहीं,’ ‘पत्थर कभी तू मोम की तरह पिघल के देख, दुनिया न गर बदल सके खुद को बदल के देख’ को श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के प्रारंभ में स्टार टीवी के ‘लाफटर चैलेंज’ चैंपियन हास्य कवि रासबिहारी गौड़ ने डॉ0 अग्रवाल का परिचय दिया। गजलगो गोपाल गर्ग और सुरेंद्र चतुर्वेदी ने गजल संग्रह की समीक्षा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी उमेश चौरसिया ने किया।
अजमेर से राजेंद्र हाड़ा की रिपोर्ट. संपर्क- 09549155160





