अवनीश मिश्र ने पर्ल ग्रुप की बिजनेस हिंदी और अंग्रेजी मैग्जीन 'मनी मंत्रा' के संपादक पद से इस्तीफा दे दिया है. जानकारी के मुताबिक अवनीश कुछ नया करने की योजना बनाए हैं जिसके तहत उन्होंने करीब 'मनी मंत्रा' के साथ की अपनी पारी को पंच वर्षीय बनाकर खत्म कर दिया. सूत्रों के मुताबिक अवनीश नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं और जल्द ही कामकाज वरिष्ठ पत्रकार व शुक्रवार मैग्जीन के संपादक विष्णु नागर को सौंपकर अपने नए प्रोजेक्ट पर सक्रिय हो जाएंगे. उन्होंने इसी महीने में वर्ष 2008 में मैग्जीन का कामकाज संभाला था और उन्हीं के नेतृत्व में हिंदी व अंग्रेजी, दोनों बिजनेस मैग्जीन की लांचिंग हुई. अवनीश मिश्र दैनिक भास्कर, दिल्ली के स्थानीय संपादक भी रह चुके हैं. वे भास्कर में करीब तीन वर्ष तक रहे.
अवनीश उन चुनिंदा बिजनेस पत्रकारों में से हैं जिन्होंने मीडिया में आने से पहले बिजनेस के विभिन्न आयामों पर गहन पढ़ाई-लिखाई करने के साथ-साथ जमीनी अनुभव हासिल करने के लिए फील्ड में भी उतरे. उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट आफ कैपिटल मार्केट से फाइनेंसियल एंड मार्केटिंग मैनेजमेंट में डिप्लोमा, जापान इंस्टीट्यूट आफ इंटरनेशनल बिजनेस टोक्यो
से इंटरनेशनल फाइनांस में डिप्लोमा, नेशनल काउंसिल आफ फाइनेंसियल मैनेजमेंट से म्यूचुअल फंड कैपिटल मार्केट डेरीवेटिव्स सर्टीफिकेशन, जेवियर इंस्टीट्यूट आफ कम्युनिकेशन बांबे से मास मीडिया की पढ़ाई की. अवनीश ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए, एमए और एमफिल करने के बाद वर्ष 1992 में बतौर फ्रीलांसर पत्रकारिता शुरू की. वे नवभारत टाइम्स के लिए पांच वर्षों तक लगातार लिखते रहे. बाद में उन्हें जेआरफ भी मिला.
वे यूटीआई म्युचुअल फंड परीक्षा उत्तीर्ण कर इसके बांबे कारपोरेट आफिस में नियुक्त हो गए. यहां वो 97 से 2001 तक रहे इसके बाद इनका तबादला चेन्नई रीजनल आफिस में बतौर एचआरडी हेड कर दिया गया. चेन्नई में वे 2001 से 2003 तक रहे. वर्ष 2003 में देहरादून यूटीआई में ट्रांसफर हो गया. यहां उन्होंने यूटीआई की मार्केटिंग का काम संभाला. वरिष्ठ पत्रकार राजेश रपरिया की प्रेरणा से वे फिर मीडिया में लौट आए और एक मार्च 2004 को अमर उजाला में बिजनेस ब्यूरो हेड के रूप में ज्वाइन किया. यहां वे अगस्त 2005 तक रहे इसके बाद दैनिक भास्कर में एक्जीक्यूटिव एडीटर कारपोरेट के रूप में ज्वाइन किया और रेजीडेंट एडीटर के रूप में इस्तीफा देकर पर्ल की बिजनेस मैग्जीन में एडीटर के बतौर पांच साल तक काम किया.





