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आतंकवाद पर सियासी बेशर्मीः भाजपा और कांग्रेस में होने लगा तेज ‘घमासान’!

बोधगया में हुए आतंकी विस्फोटों के पीछे किन लोगों की भूमिका रही है? इसको लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की पड़ताल जारी है। अभी तक इस एजेंसी ने खुले तौर पर किसी संगठन की तरफ अपनी शक की सुई नहीं घुमाई है। हालांकि, हादसे से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज उसे मिल गई है। खबर यही है कि इस फुटेज से उसे कई महत्वपूर्ण सुराग मिल गए हैं। उम्मीद की जा रही है कि इन सुरागों के जरिए जल्दी ही जांच एजेंसियां अपराधियों को शिकंजे में ले लेंगी।

बोधगया में हुए आतंकी विस्फोटों के पीछे किन लोगों की भूमिका रही है? इसको लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की पड़ताल जारी है। अभी तक इस एजेंसी ने खुले तौर पर किसी संगठन की तरफ अपनी शक की सुई नहीं घुमाई है। हालांकि, हादसे से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज उसे मिल गई है। खबर यही है कि इस फुटेज से उसे कई महत्वपूर्ण सुराग मिल गए हैं। उम्मीद की जा रही है कि इन सुरागों के जरिए जल्दी ही जांच एजेंसियां अपराधियों को शिकंजे में ले लेंगी।

गृह मंत्रालय ने रविवार को महाबोधि मंदिर परिसर सहित कई स्थानों पर हुए सीरियल विस्फोटों को आतंकवादी घटना करार कर दिया है। माना यही जा रहा है कि इस आतंकी विस्फोट की योजना के पीछे इंडियन मुजाहिदीन जैसे किसी आतंकी संगठन की भूमिका जरूर हो सकती है। शुरुआती पड़ताल के बाद इंडियन मुजाहिदीन शक के दायरे में आता जा रहा है। बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र मंदिर में हादसा हो जाने के कारण इसकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो गई है। क्योंकि, दुनियाभर के बौद्ध अनुयायी यहां पर मत्था टेकने आते रहते हैं। इस वारदात को लेकर भाजपा, कांग्रेस, राजद व जदयू के बीच जुबानी घमासान तेज हो चला है।

इस मुद्दे को लेकर ये दल आपस में एक-दूसरे के खिलाफ जमकर अपनी भड़ास निकालने लगे हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच कई मुद्दों को लेकर सियासी टकराव पहले से ही चला आ रहा है। टकराव की इस राजनीति में बोधगया के विस्फोटों से सरगर्मी और बढ़ गई है। कांग्रेस के चर्चित महासचिव दिग्विजय सिंह ने अपने एक ट्विटर संदेश के जरिए जुबानी जंग तेज करा दी है। दरअसल, दिग्विजय सिंह ने अपने ट्विटर संदेश में ऐसी उस्तादी दिखाई कि भाजपा और कांग्रेस के बीच पलटवार का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के महासचिव ने ट्विटर पर लिखा है कि भाजपा के अमित शाह अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनवाने का अलाप लगाते हैं। उसी दिन नरेंद्र मोदी टेली-कांफ्रेसिंग के जरिए बिहार के पार्टी कार्यकर्ताओं को कहते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सियासी सबक सिखा दो। इसके अगले दिन ही महाबोधि मंदिर में सिलसिलेवार विस्फोट हो जाते हैं। सवाल यह है कि क्या इन भड़काऊ बयानों और बम-विस्फोटों का कोई अंतर-संबंध है? जांच एजेंसी एनआईए को चाहिए कि वह इन पहलुओं की पड़ताल भी कर ले।

दिग्विजय सिंह के इस राजनीतिक सुर्रे से सियासी गर्मी बढ़ गई है। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने दिग्गी के खिलाफ पलटवार की रणनीति शुरू की है। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने दिग्गी की टिप्पणी को राजनीतिक शरारत कहा है। उन्होंने गुस्से में यहां तक कह डाला कि कांग्रेस को चाहिए कि ऐसे शरारती नेता को वह पार्टी से बाहर निकाल दे। क्योंकि, ये महाशय गंभीर से गंभीर मुद्दों पर राजनीतिक नाटकबाजी करने से बाज नहीं आते। कांग्रेस के प्रवक्ता भक्त चरणदास ने दिग्विजय सिंह का बचाव करते हुए कह दिया है कि एक सहज सवाल पर भाजपा के लोग इतना क्यों तिलमिला रहे हैं? भाजपा के वरिष्ठ नेता राजीव प्रताप रूडी कहते हैं कि दिग्विजय सिंह सालों से ‘बयानवीर’ की भूमिका में हैं। उनकी कोशिश रहती है कि बुनियादी मुद्दों से देश के लोगों का ‘फोकस’ हट जाए। शायद, इसीलिए वे भाजपा के खिलाफ लगातार अलाप लगाते रहते हैं। कई बार तो ऐसा लगता है कि कांग्रेस के ये महासचिव आतंकवादी संगठनों के प्रवक्ता हो गए हैं क्या? याद कीजिए, इन्हीं महाशय ने एक बार कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन को ‘लादेन जी’ कहा था। भाजपा के महासचिव धर्मेंद्र प्रधान तो दिग्विजय सिंह के विवादित ट्विटर संदेश से कुछ ज्यादा ही खफा हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि लगता है दिग्गी दिमागी रूप से दिवालिया हो चले हैं।

आतंकी धमाकों की  राजनीतिक चिकचिक के बीच कल यहां भाजपा संसदीय दल की बैठक हुई। इसमें बोधगया के धमाकों सहित कई ज्वलंत मद्दों पर चर्चा की गई। यही तय हुआ कि राजनाथ सिंह और नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के लिए चुनावी रणनीति का खाका तैयार करेंगे। इस खाके की चर्चा संसदीय बोर्ड की अगली बैठक में होगी। नरेंद्र मोदी, चुनाव प्रचार अभियान समिति के प्रमुख बनाए गए थे। नई भूमिका में वे चुनावी रणनीति को लेकर काफी सक्रिय हैं। उन्होंने कहा है कि बोधगया जैसी आतंकी घटनाओं के मामले में कहीं न कहीं केंद्र सरकार और बिहार सरकार की लापरवाही जरूर रही है। अच्छा यही है कि दोनों सरकारें अपनी लापरवाही स्वीकार करें और इससे आगे के लिए सबक लें। उल्लेखनीय है कि महाबोधि मंदिर के परिसर में और उसके बाहर रविवार को 10 धमाके किए गए थे। गनीमत यही रही कि इन विस्फोटों में महज दो लोग घायल हुए हैं। आतंकवादियों के खास निशाने पर पवित्र महाबोधि वृक्ष था। इस वृक्ष को भी आंशिक रूप से ही नुकसान पहुंचा है। 

जांच एजेंसी एनआईए को महाबोधि मंदिर परिसर से महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज मिल गई है। इसके जरिए कुछ संदिग्ध लोगों की पहचान की जा रही है। गृह मंत्रालय के सूत्रों का दावा है कि जल्दी ही जांच एजेंसियों के हाथ गुनहगारों के गले तक पहुंच जाएंगे। आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की भूमिका काफी संदिग्ध मानी जा रही है। क्योंकि, इस संगठन से जुड़े कुछ गुर्गों ने पहले ही यह कबूला था कि उनकी योजना महाबोधि मंदिर में भी आतंकी हमला करने की है। इस आशय की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी ने महाबोधि मंदिर की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर बिहार सरकार को अलर्ट भी भेजा था। लेकिन, बिहार सरकार ने इस अलर्ट के बावजूद मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था ज्यादा पुख्ता नहीं की। इसके चलते बिहार की नीतीश सरकार भी सियासी आलोचना की जद में आ गई है।

इस घटना को लेकर बिहार में राजद और भाजपा ने नीतीश सरकार के खिलाफ राजनीतिक स्यापा तेज कर दिया है। मगध क्षेत्र के कई जिलों में दोनों दलों ने अलग-अलग बंद के कार्यक्रम भी रखे। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुतले तक फूंके गए और उनके खिलाफ जमकर मुर्दाबाद के नारे लगे। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव के सी त्यागी कहते हैं कि भाजपा के लोग गठबंधन टूटने के बाद ओछी राजनीति पर उतर आए हैं। कम से कम आतंकवाद जैसे मामलों पर उन्हें घटिया किस्म की राजनीति से बाज आना चाहिए। यदि उन्हें मुर्दाबाद के नारे लगाने का ही शौक है, तो नीतीश कुमार के बजाय आतंकवाद के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाएं, तो शायद इससे राष्ट्रीय हित ज्यादा सधेगा। नीतीश कुमार ने अपने खिलाफ चल रही नारेबाजी को लेकर टिप्पणी कर दी है कि कुछ लोग सत्ता के बगैर बेचैन हो गए हैं। वे छटपटा कर मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं। लेकिन, इनको नहीं भूलना चाहिए कि नीतीश कुमार उनकी तरह से सिर्फ बयान बहादुर नहीं हैं, जमीनी नेता हैं। ऐसे में, चुनावी मैदान में उन्हें पता चल जाएगा कि बिहार में उनकी सियासी जमीन कितनी बची है?

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव लंबे समय बाद पुराने खांटी तेवरों में दिखाई पड़ रहे हैं। उन्होंने इस आतंकी मुद्दे के बहाने नीतीश सरकार की तीखी आलोचना शुरू की है। लालू ने अल्पसंख्यकों को अगाह कर दिया है कि वे जदयू नेताओं के झांसे में न फंसे। क्योंकि, इनका कोई ठिकाना नहीं है कि ये लोग फिर कब भाजपा से हाथ मिला लें? भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के साथ जदयू नेतृत्व के खिलाफ भी सियासी रार बढ़ा दी है। भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने नीतीश पर तीखा कटाक्ष किया है। कह दिया कि वे इस्लामी गोल टोपी पहनने से ही मुस्लिम समाज के ‘हीरो’ नहीं बन जाएंगे। उन्हें यह गलतफहमी निकाल देनी चाहिए। पलटवार करते हुए जदयू के नेता के सी त्यागी ने कहा है कि भाजपा के नेता भी महज लाल टीका लगा लेने से हिंदु हितैषी नहीं बन सकते? उन्हें भी यह पाखंडी गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए।

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।

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