आईएफडब्लूजे के अधिवेशन (रायपुर) मे शिरकत करने के बाद एक बात मेरी समझ में आ गयी कि जिस तरह पत्रकारिता में गिरावट हो रही है उसी तरह आईएफडब्लूजे के क्रियाकलापों में भी गिरावट आयी है. मैं 1986 से इस संगठन के क्रिया कलापों से जुड़ा हूँ लेकिन पहले जिस तरह पत्रकारों के हित के लिये इस मंच का उपयोग किया जाता था वैसा अब नही हो रहा है. यह संस्था श्रमजीवी पत्रकारों की है.
श्रमजीवी का मतलब जिनकी रोजी रोटी का मुख्य साधन पत्रकरिता से मिलने वाली आय ही हो. रायपुर में लगभग 350 प्रतिनिधि पूरे देश से आये थे जिनमे से करीब 70 यूपी के थे. इनमे से अधिकांश ऐसे पत्रकार थे जो इतर धंधे में हैं और एन केन प्रकारेण पत्रकारिता का चोंगा पहन लिया है, इनमे से कोइ सायकिल स्टैंड चलाता है कोइ ठेकेदारी करता है किसी का प्रेस है, कोइ धनवसूली कर रुतबा झाडता है.मजे की बात है कि यही जुगाड़ू पत्रकार आईएफडब्लूजे के अध्यक्ष के बगलगीर थे. लगता है इन्ही फर्जी पत्रकारों को संरक्षण दे अध्यक्ष महोदय 30 सालों से कुर्सी पर जमे हैं.
आपको यह जान कर हैरत होगी कि जिस समारोह में प्रदेश का मुख्यमंत्री, विधानसभा का अध्यक्ष शिरकत कर रहा हो उस समारोह का समाचार किसी अखबार में ना आया. किसी गलीकूचे से निकलने वाले अखबार में आया हो तो मैं नही जानता. इस बाबत जब मैंने वहां के बड़े अखबारों के प्रतिनिधिओं से बात की तो उनका जवाब था…. आयोजक फर्ज़ी पत्रकार हैं. अब सोचिये इस आयोजन के माध्यम से आयोजकों ने चांदी काटी या आईएफडब्लूजे के अध्यक्ष महोदय ने अपना उल्लू सीधा किया. चर्चा रही कि राव साहब राज्यसभा का ख्याब देख रहे हैं इसके लिये वे बीजेपी के सहारे के आकांक्षी हैं. जिस तरह उन्होने भिलाई में अपना जूलूस निकलवाया उसे देख कर उनके ही परम मित्र स्वर्गीय जार्ज फर्नांडीज की आत्मा कराह उठी होगी. राव साहब अति कुलीन परिवार से सम्बंध रखते है और स्वयम मेधावी हैं फिर उन्हें सड़क छाप नेताओं की तरह जुलूस निकालने की क्या जरूरत पडी थी.
यह जुलूस यदि पत्रकार निकालते तो भी गनीमत थी किंतु जुलूस के अयोजक ट्रांसपोर्ट असोसियेसन, खुदरा व्यापारी संघ, फल विक्रेता संघ आदि थे. अधिवेशन का तीन स्थानों पर होना भी हैरतअंगेज था. उदघाटन रायपुर में, धमतरी में सम्मान समारोह फिर चम्पारन्य में रात्रि विश्राम. अधिवेशन का जो अधिकृत कार्यक्रम सूचित किया गया था उसमें से अनेक कार्यक्रम नदारत थे. पत्रकारों के हित की चिंता भले ही अधिवेशन में ना की गयी किंतु मौजूद पत्रकारों को चम्पारन्य, पुर्खोती मुक्तांगन. स्टेडियम, गंग्रेल बांध आदि अवलोकन कराने के लिये आयोजक धन्यवाद के पात्र जरूर है.
चम्पारन्य में भगवान वल्लभाचार्य का प्राकट्य स्थल है और यह मंदिर ना केवल खूबसूरत है बल्कि यह वह जगह है जहां नास्तिक भी जाकर सर झुकाने को मजबूर होगा, भगवान वल्लभाचार्य को भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है. यह मंदिर रायपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर है. कुकरैल डैम (हाईड्रो प्रोजेक्ट) में 1000 मेगावाट बिजली पैदा होती है और यह पर्यटकों का मुख्य केंद्र है.
रायपुर से 20 किलोमीटर दूर नया रायपुर बसाया जा रहा है. यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बन गया है जहां आईपीएल का एक मैच भी हुआ था मई में. इस खूबसूरत स्टडियम के प्लेयर्स ड्रेसिंग रूम को हम सभी पत्रकारों ने शेयर किया और भी मजे लिये. पुरखौती में छत्तीसगढ की लोक संस्कृति को समेटे एक अति खूबसूरत पार्क है. यहां बुतों के माध्यम से लोक संस्कृति और कला को दर्शाया गया है.तीन नदियोंके संगम नाजिम और भिलाई स्टील प्लांट समयाभाव के कारण नही जा सके इसका मलाल है.
वाराणसी के पत्रकार दुनिया के हर कोने में हैं और इससे रायपुर भी अछूता नही रहा, यहाँ दूरदर्शन के निदेशक राघवेश पांडेय(गोपेश पांडेयके अनुज) ,दैनिक भास्कर के विजय नारायण सिंह ने हम लोगों के साथ जो आत्मीयता दिखायी और सहयोग किया उसके लिये वे बधाई के पात्र हैं , बिलासपुर में घासीराम विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के शिवकृपा मिश्र ने तो रात 11 बजे ट्रेन में हम लोगो को डिनर कराया. शिवकृपा बनारस में आज से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की थी किंतु अब भी वे बनारस से काफी लगाव रखते हैं.
शंकर दुबे






