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लखनऊ

सपाइयों के ‘टमाटर’ से डर गये बेनी बाबू

‘डर के आगे जीत है।’ पेय पदार्थ बनाने वाली एक कम्पनी का यह स्लोगन कांग्रेस नेता और केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा पर स्टीक बैठता है। पिछले काफी समय से सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को पानी पी-पीकर कोसने वाले बेनी बाबू के अचानक मुलायम के प्रति सुर बदलने को उक्त स्लोगन के साथ जोड़ कर देखा जा रहा है। बेनी प्रसाद वर्मा पिछले कुछ माह से अपने पूर्व साथी और राजनैतिक हमसफर रहे मुलायम के खिलाफ काफी तल्ख टिप्पणी कर रहे थे। असंसदीय भाषा का भी प्रयोग उनके(बेनी) द्वारा किया जा रहा था। पिछले दिनों उन्होंने यह कहकर सभी मर्यादाएं लांघ ली कि मुलायम तो प्रधानमंत्री निवास पर झाड़ू लगाने लायक भी नहीं है।इस बात को मुलायम ने ज्यादा तरजीह नहीं दी और यह कहकर चुप हो गये कि वह हमारे पुराने मित्र हैं और हमारा प्रचार कर रहे हैं।

‘डर के आगे जीत है।’ पेय पदार्थ बनाने वाली एक कम्पनी का यह स्लोगन कांग्रेस नेता और केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा पर स्टीक बैठता है। पिछले काफी समय से सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को पानी पी-पीकर कोसने वाले बेनी बाबू के अचानक मुलायम के प्रति सुर बदलने को उक्त स्लोगन के साथ जोड़ कर देखा जा रहा है। बेनी प्रसाद वर्मा पिछले कुछ माह से अपने पूर्व साथी और राजनैतिक हमसफर रहे मुलायम के खिलाफ काफी तल्ख टिप्पणी कर रहे थे। असंसदीय भाषा का भी प्रयोग उनके(बेनी) द्वारा किया जा रहा था। पिछले दिनों उन्होंने यह कहकर सभी मर्यादाएं लांघ ली कि मुलायम तो प्रधानमंत्री निवास पर झाड़ू लगाने लायक भी नहीं है।इस बात को मुलायम ने ज्यादा तरजीह नहीं दी और यह कहकर चुप हो गये कि वह हमारे पुराने मित्र हैं और हमारा प्रचार कर रहे हैं।

कांग्रेस ने बेनी को जुबान पर लगाम लगाने को कहा तो वह गुस्से से लाल पीले हो गये और यहां तक कह दिया कि मुलायम के खिलाफ बोलने से रोका गया तो वह कांग्रेस छोड़ देंगे, लेकिन उनकी यह धमकी हेकड़ी से अधिक कुछ नहीं थी। वह ठंडे पड़ गये, परंतु, नेताजी के समर्थकों का गुस्सा शांत नहीं हुआ था। उन्होंने बेनी को उनके ही संसदीय क्षेत्र में सबक सिखाने का मन बना लिया। गोंडा में बस स्टैंड स्थित डाकघर परिसर और खोरहसा में बेनी के 07 जुलाई को दो कार्यक्रम लगे थे। डाकघर स्थित कार्यक्रम में उनके पहुंचने से पहले ही सपा कार्यकर्ता वहां आ धमके और खूब हुड़दंग किया। कुर्सियां फेंक दीं। बेनी बाबू के बैनर फाड़ने की कोशिश भी हुई। पुलिस के पहुंचते ही सपाई वहां से खिसक गये। पुलिस ने किसी तरह भारी सुरक्षा बल के सहारे बेनी का कार्यक्रम निपटवा दिया। उनके खोरहसा में होने वाले कार्यक्रम में भी सपाई व्यवधान खड़ा करने की पूरी तैयारी में थे। संभवतया इस बात की भनक बेनी को भी लग गई थी। यही वजह थी बेनी के सुर एकदम से बदल गये। मीडिया ने जब बेनी को उनके संबंधम में मुलायम के बयान की जानकारी दी तो बेनी बाबू ने पलटी मारते हुए घोषणा कर दी, ‘मुलायम प्रधानमंत्री बनते हैं तो सबसे पहले मैं ही उन्हें माला पहनाऊंगा।’

बेनी के बयान के बाद सपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा शांत हो गया। सपा के जिलाध्यक्ष महफूज खॉ ने बाद में रहस्योद्घाटन किया कि डाकघर के पास बेनी के कार्यक्रम में किसने क्या व्यवधान खड़ा किया यह तो वह नहीं जानते, लेकिन खोरहसा में बेनी प्रसाद को वर्मा को सपा कार्यकर्ताओं ने मुंहतोड़ जबाव देने के लिये योजना बनाई थी। बेनी बाबू के बदले रूख से सपाई गद्गद नजर दिखे उनका कहना था जो काम कांग्रेस की नसीहत और सपा के बड़े नेताओं तल्खी नहीं कर पाई, वह टमाटर और अंडों के डर ने पूरा कर दिया। बेनी ‘डर’ गये और सपा ‘जीत’ गई। बेनी प्रसाद यहां नेताजी के प्रति कोई अपमानजनक टिप्पणी करते तो सपा कार्यकर्ता उनके ऊपर सड़े टमाटरों और अंडों की बारिश करते। वैसे बेनी के निशाने पर मोदी जरूर रहे, और उन्होंने कहा कि मोदी गंगाजल पीकर लौट जायेंगे।

बहरहाल बात कुछ समय पहले की कि जाये तो सांसद सत्र के दौरान अपने विवादित बयान से केन्द्र की यूपीए सरकार के लिये परेशानी खड़ी करने वाले केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का मुलायम राग लम्बे समय से चल रहा था। शायद उन्हें पता रहता था कि मुलायम पर हमला करने से सपा के अंदर उबाल आ जाता है। इसीलिये उन्होंने कभी डा लोहिया के सहारे सपा के ब्राहमण सम्मेलनों पर ही प्रश्नचिन्ह लगाया और सपा के ब्राहमण सम्मेलनों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सब सपा वोट बैंक की राजनीति के लिये कर रही है जबकि लोहिया जी हमेशा जातिगत राजनीति का विरोध करते हुए कहा करते थे ‘जाति तोड़ो, समाज जोड़ो।‘ तो कभी यहां तक कह दिया कि बाबरी मस्जिद विध्वंस सपा प्रमुख की भाजपा से साठगांठ थी।

अपनी बात साबित करने के लिये वह कुछ तथ्य भी सामने रखते थे। इसमें कोई संदेह नहीं है कि बेनी जैसा चाहते थे, हर बार वैसा ही होता था। सपाई बेनी के खिलाफ जहर उगलने लगते। बेनी को भी बिना ज्यादा मेहनत किये प्रचार मिल जाता। बात रोग से ग्रस्त बेनी पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने हमला बोलते हुए यहां तक कह दिया कि केन्द्रीय इस्पात मंत्री किसी गम्भीर मनोरोग से ग्रसित हैं। वे अनर्गल, ऊलजुलूल और बेसिर पैर के बयान दे रहे है। अपने इतिहास ज्ञान का वे सार्वजनिक मजाक बना रहे हैं। आरएसएस की शाखाओं में ''नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे'' का नित्यप्रति पाठ करनेवाले बेनी प्रसाद वर्मा को न जाने कहां से डा0 लोहिया याद आ गए। उनको डा0 लोहिया की विचारधारा की इतनी ही समझ होती तो वे समाजवादी पार्टी में बने रहते। अपने अवसरवादी चरित्र का परिचय ही उनकी अपनी नीति और नियत है।

सपा नेता आरोप लगाते हैं कि बेनी जानते है कि मुलायम सिंह यादव ऐसे पहले राजनेता थे जिन्होने यह एलान किया था कि यह देश आस्था से नहीं संविधान से चलेगा। जहां कहीं अन्याय या धर्मनिरपेक्षता पर चोट हुई है, आगे बढ़कर मुलायम ने ही मोर्चा सभाला है। आज भी वे सामाजिक न्याय की ताकतों को मजबूत करने में लगे हैं। उन पर केन्द्रीय इस्पात मंत्री के आरोप स्वयं को लांछित करनेवाले हैं। उनका बयान घोर निन्दनीय है।

लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार का विश्लेषण.

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