ललितपुर। शुक्रवार को ललितपुर जिले में आयोजित वन विभाग का एक कार्यक्रम पूरी तरह से दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ रवीन्द्र दिवाकर का पारिवारिक कार्यक्रम बन कर रह गया। ब्यूरो चीफ की बेटी फॉरेस्ट गार्ड की एसएलआर राइफल को लेकर फोटो शूट कराती रही। इस दौरान जिलाधिकारी ओपी वर्मा, डीएफओ से लेकर सारे आला अधिकारी समेत तमाम पुलिस कर्मी भी मौजूद थे।
ब्यूरो चीफ की बेटी एसएलआर राइफल से आधे घंटे तक खेलती रही। इस दौरान वहां खड़े पुलिस वाले मुस्कराते रहे। अधिकारी भी इसे सामान्य घटनाक्रम मानकर शांत रहे। क्या कानूनन यह सही है कि किसी सरकारी गार्ड की एसएलआर लेकर कोई फोटो खिंचाता रहे?

दूसरे, क्या यह किसी पत्रकार के लिए उचित है कि वह किसी सरकारी कार्यक्रम में अपने परिजनों के साथ जाकर वहां इतना करीबी बन जाए और घुलमिल जाए कि ब्यूरोक्रेसी व मीडिया में कोई फर्क ही नजर न आए? मीडिया का काम तो ब्यूरोक्रेसी और सरकारी कार्यक्रमों पर नजर रखना है, लेकिन जब मीडिया के लोग खुद इनके इतने नजदीकी बन जाएंगे तो फिर आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि ऐसे कार्यक्रमों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग होगी?
ललितपुर से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






