: जनपद की नगर पंचायतों को लिखित दिया आदेश : पत्रकारों ने भेजा प्रेस काउंसिल ऑफ इण्डिया को शिकायती पत्र : बाराबंकी। अपर जिलाधिकारी द्वारा नगर पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों में टेण्डर प्रक्रिया के प्रकाशित विज्ञापनों के लिए सिर्फ चार अखबारों को छपवाने के निर्देश के बाद अधिकांश अखबारों के पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त हो गया है। एक तरफ जहां अपर जिलाधिकारी के इस तुगलकी फरमान से नाराज होकर पत्रकारों ने इसकी शिकायत प्रेस काउंसिल ऑफ इण्डिया व प्रदेश के मुख्यमंत्री से की है। वहीं दूसरी तरफ जनपद के पत्रकारों ने इनके खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया है।
जानकारी के अनुसार बाराबंकी जनपद में लगभग दो दर्जन के करीब दैनिक समाचार पत्र आते हैं। इनके पाठकों की संख्या भी कम नहीं है। इतना ही नहीं इन अखबारों में विज्ञापन और दृष्य प्रचार निदेशालय व सूचना निदेशालय उ0प्र0 द्वारा सरकारी रेट भी निर्धारित कर रखे हैं। जिसमें अधिकांश विभागों के अधिकारियों द्वारा विज्ञापन भी दिया जाता है। इन अधिकारियों की यह सोच रखी है कि कम पैसे में काम भी हो जाये और सरकारी पैसो की ज्यादा बरबादी न हो जाये।
इधर आठ जुलाई को अपर जिलाधिकारी बाराबंकी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने पत्रांक संख्या 1982 (टीएसी निर्माण कार्य टेण्डर) में जनपद की नगर पंचायतों क्रमशः नगर पालिका नवाबगंज, नगर पंचायत हैदरगढ़, दरियाबाद, टिकैतनगर, सिद्धौर, जैदपुर, सतरिख, सुबेहा, बंकी, देवां, फतेहपुर, रामनगर आदि के अधिशाषी अधिकारियों को यह निर्देशित किया है कि जितने भी टेण्डर इन नगर पंचायतों में निकाले जाये वे सिर्फ चार समाचार पत्र (दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा व उमर उजाला) में ही निकलवाये जायें।
उन्होंने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि यह सभी टेण्डर और अनुबंधो का विवरण विभागीय वेबसाइड पर अपलोड करे जाये तथा इनकी एनआईसी बाराबंकी में सीडी के माध्यम से जिले की वेबसाइड पर अपलोड कर दी जाये। इतना ही नहीं सभी टेण्डरों के विज्ञापन प्रति को कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करायें। उन्होंने यह भी कहा है कि टेण्डर बिक्री करने के लिए नामित सम्बन्धित कार्यालय से बिक्री कराये जायें। इतना ही नहीं पांच लाख रूपये से अधिक लागत वाले प्रत्येक कार्य के टेण्डर को जिला स्तर पर जमा कराया जाये।
उन्होंने अपने पत्र में इन समाचार पत्रों के अलावा अन्य समाचार पत्रों को चोर साबित कर दिया है क्योंकि उन्होंने लिखा है कि इन चार समाचार पत्रों के अलावा जो भी विज्ञापन अन्य अखबारों में छपवाये जाते हैं वे चोरी छुपे होते हैं। अगर इन अखबारों के अलावा अन्य समाचार पत्रों में विज्ञापन छपवाये गये तो वे मान्य नहीं होंगे व इनके विरूद्ध कार्यवाही भी की जायेगी।
अपर जिलाधिकारी जितेन्द्र सिंह के इस तुगलकी फरमान के बाद नगर पंचायतों के अधिशाषी अधिकारियों सहित नगर पंचायत अध्यक्षों में भी आक्रोश व्याप्त है। नगर पंचायत देवां, सिद्धौर आदि के अध्यक्षों ने तो अपनी शिकायत भी प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री अरविन्द सिंह गोप से दर्ज करा दी है। वहीं अपर जिलाधिकारी के इस हिटलरशाही आदेश के बाद जनपद के कई दशकों से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्रों के पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त हो गया है।
(अगर पढ़ने में न आए तो उपरोक्त पत्र पर क्लिक कर दें)
जिले के पत्रकार व ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार शुक्ला ने अपर जिलाधिकारी के इस तुगलकी फरमान की लिखित शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व प्रेस काउंसिल ऑफ इण्डिया के अध्यक्ष श्री काटजू से की है। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर अपर जिलाधिकारी ने अपर तुगलकी आदेश वापस नहीं लिया तो इनके खिलाफ मोर्चा खोला जायेगा। इनकी खबरों का बहिष्कार किया जायेगा और धरना प्रदर्शन भी किया जायेगा। इस संबंध में एडीएम के सीयूजी नम्बर पर फोन करके उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गयी तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। वैसे इस तुगलकी फरमान के आदेश की कई राजनैतिक दलों के नेताओं ने भी निन्दा की है।






