खुद श्री चंद्र ने ये जानकारी अपने फेसबुक वॉल के जरिए अपने जानने वालों को दी है. उन्होंने लिखा है- ''८ जुलाई को जब नेशनल दुनिया के प्रधान सम्पादक श्री शैलेंद्र भदौरिया ने मुझे दिल्ली संस्करण का स्थानीय संपादक बनाने की घोषणा की तो मित्रों और सहयोगिओं ने जमकर खुशियाँ मनाई। मुझे भी अच्छा लगा। कुछ अजीब भी लगा कि कैरिअर के इतने साल बाद इसका क्या मतलब है। फिर लगा, तरक्की जीवन के किसी भी मुकाम में मिले, उसे अपनी मिहनत का फल मानना चाहिय और मैंने माना भी। इसी भाव से मैंने इसे ग्रहण किया और खुश हो गया। तो मित्रों अब मैं नेशनल दुनिया का रेजिडेंट एडिटर हूँ और अपने आलोचकों का जीवंत जबाव भी। लेकिन अपने शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा करना भी मेरा फ़र्ज़ है सो, उन सभी का शुक्रिया जिन्होंने कभी भी मेरे लिए कुछ भी अच्छा सोचा या कामना की।''
इसको लेकर यह चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि दिल्ली के संपादक प्रदीप सौरभ की क्या स्थिति होगी? प्रदीप सौरभ से जुड़े लोगों का कहना है कि नेशनल दुनियों में एडिटरों की फौज है. ज्यादातर लोगों को यहां एडिटर बनाकर रखा गया है. ऐसे में किसी को प्रमोट कर रेजीडेंट एडिटर बना देने से कोई खास अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. प्रदीप सौरभ दिल्ली एडिशन के एडिटर हैं और श्री चंद रेजीडेंट एडिटर बनाए गए हैं. रेजीडेंट एडिटर हमेशा एडिटर के अधीन रहकर काम करता है.
उधर, कुछ लोगों का कहना है कि नेशनल दुनिया प्रबंधन श्री चंद को प्रमोट कर उन्हें प्रदीप सौरभ का विकल्प बना रहा है. इससे प्रतीत होता है कि देर सबेर नेशनल दुनिया, दिल्ली में उलटफेर हो सकता है.





