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सुखतवा मीडिया संवाद (3) : मीडिया हाउसेस रिपोर्टिंग पर खर्च कम करते जा रहे, इसीलिए चैनलों पर टॉक शो की बाढ़ आ गई है

इस सत्र के खत्म होते-होते हॉल में वो शख्स दाखिल हो गया, जो पत्रकारिता जगत में एक आदर्श नायक की तरह स्थापित है। 70 के दशक के अमिताभ (गरीब, मजलूम और किसानों के हक की लड़ाई का प्रतीक नायक) सरीखा कद हासिल कर चुके पी साईंनाथ मंच पर आसीन थे। 'कॉरपोरेट हस्तक्षेप और मीडिया' पर अपनी बात इस मुनादी के साथ शुरू की कि असहमति का कोई भी सुर, कोई भी सवाल बीच व्याख्यान में मुमकिन है।

इस सत्र के खत्म होते-होते हॉल में वो शख्स दाखिल हो गया, जो पत्रकारिता जगत में एक आदर्श नायक की तरह स्थापित है। 70 के दशक के अमिताभ (गरीब, मजलूम और किसानों के हक की लड़ाई का प्रतीक नायक) सरीखा कद हासिल कर चुके पी साईंनाथ मंच पर आसीन थे। 'कॉरपोरेट हस्तक्षेप और मीडिया' पर अपनी बात इस मुनादी के साथ शुरू की कि असहमति का कोई भी सुर, कोई भी सवाल बीच व्याख्यान में मुमकिन है।

पी साईंनाथ ने कहा कि विकास संवाद की परिचर्चा के इन तीन दिनों में देश में समानांतर रूप से जो कुछ घटित हो रहा है, वो काफी चिंतनीय है। इन तीन दिनों में देश के 147 किसान आत्महत्या कर चुके होंगे, इन तीन दिनों में 3000 बच्चे कुपोषण और उसकी वजह से होने वाली बीमारियों से दम तोड़ चुके होंगे।

मीडिया को उन्होंने राजनीतिक रूप से स्वतंत्र लेकिन मुनाफे का गुलाम बताया। शारदा चिटफंड से लेकर एनडीटीवी प्रॉफिट से पत्रकारों की छंटनी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की नौकरी की किसी को चिंता नहीं है बल्कि इस पूरे गोरखधंधे में मीडिया हाउसेस कॉरपोरेट घरानों की मनमर्जी और इशारे के तहत काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने मीडिया मॉनोपॉली को कॉरपोरेट मोनोपॉली का एक हिस्सा बताया।

पी साईंनाथ ने कहा कि अब मीडिया हाउसेस रिपोर्टिंग पर खर्च कम करते जा रहे हैं। यही वजह है कि चैनलों पर टॉक शो की बाढ़ आ गई है क्योंकि इसमें खर्च कम है। इसी तरह संपादकों की जगह सीईओ, मैनेजिंग एडिटर, एक्जक्यूटिव एडिटर जैसे पदों के गठन को भी उन्होंने पत्रकारिता के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। मीडिया हाउसेस और कॉरपोरेट हाउसेस के बीच होने वाली 'प्राइवेट ट्रीटी' को भी उन्होंने पत्रकारिता की आजादी में बाधक बताया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे मीडिया घरानों के हित बाजार के हित के साथ जुड़ते जाएंगे, एक तरह का खतरनाक नेक्सस खबरों को दबाने, छिपाने और उन्हें विकृत करने में सक्रिय होता जाएगा।

पी साईंनाथ ने कहा कि हाल के दिनों में इलेक्ट्रानिक मीडिया ने कोई बड़ी ख़बर ब्रेक की हो, इसके उदाहरण बेहद कम मिलते हैं। मीडिया के पतन के साथ पत्रकार 'कॉमेडियन रिलीफ' देने का काम करते नजर आते हैं। ऐसे में पत्रकारों को गुरिल्ला जर्नलिज्म की आदत डाल लेनी चाहिए। संस्थानों में रहते हुए वो कैसे समाज और आम आदमी की बात सामने रख पाते हैं, ये उनकी निजी काबिलियत का विषय है।

इसके साथ ही उन्होंने पेड न्यूज को लेकर भी अपनी राय रखी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इलेक्शन के दौरान पेड न्यूज की पकड़ आसान हो जाती है लेकिन बहुत बड़ा हिस्सा नॉन इलेक्शन पेड न्यूज का भी है। उन्होंने पत्रकारिता जगत में आने वाले युवाओं से वैकल्पिक मीडिया को अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक पत्रकार को एक से ज्यादा हुनर का मास्टर होना चाहिए ताकि वो अलग-अलग माध्यमों से अपनी बात कह सके। उन्होंने अपनी ओर से किए जा रहे आर्काइव प्रोग्राम की एक झलक भी दिखाई। पी साईंनाथ ने उन लोगों के दिमाग के तारों को झंकृत कर दिया जो न्यूज रूम के शोर में भी सोने की आदत पाले बैठे हैं।

विकास संवाद में इसके बाद के सत्रों में भी कुछ बातें हुईं लेकिन पी साईंनाथ ने मीडिया के इतने आयाम खोल दिए कि दिमाग में लंबे समय तक वो उमड़ते घुमड़ते रहेंगे।

केसला से वापसी में एक अलग तरह की भूख का एहसास तीव्रतर हो गया। 'भूख' उदर से कुछ ऊपर शिफ्ट हो चुकी थी। विकास संवाद की सार्थकता बस इतनी है कि वो इस भूख को जगा तो सकता है मिटा नहीं सकता। भूखे पेट भजन भले न हो भूखे मन में नए गीत गूंजते हैं… शायद हममें से कोई साथी कभी ऐसा ही कोई नया गीत गुनगुनाएं तो इस आयोजन की सार्थकता और ज्यादा बढ़ जाएगी।

…समाप्त…

पशुपति शर्मा की रिपोर्ट. संपर्क: 9868203840


इसके पहले के पार्ट…

सुखतवा मीडिया संवाद (2) : मंगल पर जीवन तलाशने वाला मानव पृथ्वी पर जीवन के ख़ात्मे में सहभागी बना बैठा है

सुखतवा मीडिया संवाद (1) : आजादी के पहले प्यार और पॉलीटिक्स दोनों ही चाइनीज़ मोबाइल की तरह नहीं थे


इसी आयोजन की कुछ अन्य रिपोर्ट–

दैनिक जागरण के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में रियल एस्टेट, मैक्डोनल्ड्‍स, टैक्स कंसल्टेंट्स और सीए नजर आएंगे, पत्रकार नहीं
 
टीओआई वाले 119 कंपनियों के लिए पेड न्यूज छापते हैं
 
 
एनडीटीवी के मुंबई दफ्तर से 250 पत्रकारों की नौकरियां गईं, सब चुप रहे
 
 
‘न्यू कन्वर्जेंस’ मीडिया के लिए नया और बहुत बड़ा खतरा : पी साईनाथ
Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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