चिंतन-मनन की गंभीर वैचारिक एवं शोधपरक पत्रिका 'दृष्टि विमर्श' का ऑनलाइन प्रकाशन आरंभ हो गया है. इसे drishtionline.in पर लॉग इन करके पढ़ा जा सकता है. यह पत्रिका शिक्षा पर कार्य करनेवाली मशहूर संस्था 'सिद्ध' (मसूरी, उत्तराखंड) की ओर से प्रकाशित की जा रही है.
आरंभ में इसके कुछ अंक सिर्फ ऑनलाइन ही निकाले जाएंगे, फिर इसे मुद्रित रूप में भी निकालने की योजना है. वैसे इसके संपादक मंडल में 'सिद्ध' के निदेशक पवनकुमार गुप्त के आलावा आज़ादी बचाओ आंदोलन से लम्बे समय तक जुड़े रहे अभय प्रताप, संत समीर एवं शिवदत्त जैसे गंभीर लोग शामिल हैं. अभी इसके संपादन का दारोमदार मुख्य रूप से अभय प्रताप एवं शिवदत्त पर है.
'दृष्टि विमर्श' का प्रवेशांक 'भारतीय बनाम पश्चिमी सभ्यता' पर केंद्रित है. इस अंक में तिब्बती सरकार (निर्वासित) के पूर्व प्रधानमंत्री समदोंग रिनपोछे, भारतीय समाज व्यवस्था के अध्येता रविन्द्र शर्मा 'गुरूजी', प्रख्यात विचारक एवं चिंतक धर्मपाल, जाने माने चिंतक-विचारक नंदकिशोर आचार्य, प्रख्यात गाँधीवादी लेखक जैनेन्द्र कुमार जैसे दिग्गज लोगों के लेख समाहित हैं. प्रवेशांक का प्रत्येक लेख अपनेआप में कुछ नया कहने की कोशिश तो करता ही है, एक गंभीर बहस को भी आमंत्रित करता है.
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