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सु्ब्रत राय और केडी सिंह जैसों के राजा भोज बनने की ये है वजह

Deepak Sharma : REPUBLIC OF CHICKEN OR REPUBLIC OF INDIA … नमक से लेकर स्टील तक बनाने वाला टाटा ग्रुप मंदी की मार में पिसा जा रहा है और बिना किसी उत्पादन के सहाराश्री लन्दन और न्यूयार्क में दुनिया के सबसे महंगे होटल कैश देकर खरीद रहे हैं. जी हाँ, लोन पर नहीं कैश देकर खरीद रहे हैं. विश्वस्तर की 4WD गाडियां बना रहे आनंद महिंद्रा को पहली बार एक महीने के लिए फैक्ट्री में उत्पादन बंद करना पड़ रहा है लेकिन तृणमूल कांग्रेस के एमपी और उद्योगपति केडी सिंह ने एक के बाद एक निजी जेट विमान खरीदकर संस्थागत अय्याशी के मायने बदल दिये हैं. केडी सिंह की एक कम्पनी का नाम Republic of Chicken है, जो मुर्गे बेचती है और ग्रुप का नाम Alchemist है जो मूल: फाइनेंस का काम करती है.

Deepak Sharma : REPUBLIC OF CHICKEN OR REPUBLIC OF INDIA … नमक से लेकर स्टील तक बनाने वाला टाटा ग्रुप मंदी की मार में पिसा जा रहा है और बिना किसी उत्पादन के सहाराश्री लन्दन और न्यूयार्क में दुनिया के सबसे महंगे होटल कैश देकर खरीद रहे हैं. जी हाँ, लोन पर नहीं कैश देकर खरीद रहे हैं. विश्वस्तर की 4WD गाडियां बना रहे आनंद महिंद्रा को पहली बार एक महीने के लिए फैक्ट्री में उत्पादन बंद करना पड़ रहा है लेकिन तृणमूल कांग्रेस के एमपी और उद्योगपति केडी सिंह ने एक के बाद एक निजी जेट विमान खरीदकर संस्थागत अय्याशी के मायने बदल दिये हैं. केडी सिंह की एक कम्पनी का नाम Republic of Chicken है, जो मुर्गे बेचती है और ग्रुप का नाम Alchemist है जो मूल: फाइनेंस का काम करती है.

मित्रों, सहाराश्री और केडी सिंह जैसे एक दर्ज़न बड़े नाम और भी हैं वित्त मंत्रलाए की फाइलों में… लेकिन उन नामों का ज़िक्र बाद में. पहले ये जान लीजिए कि गंगू तेलियों के इस दौर में किस फार्मूला ने केडी और सहाराश्री को राजा भोज बना रखा है. इन्हें जुर्माने दर जुर्माने के बाद भी घाटा क्यों नहीं हो रहा?

ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक देश के 5 लाख गांव में अभी भी सिर्फ 32 हज़ार गांव तक ही सरकारी बैंकों की सीधी पहुँच है. 1969 में जब बैंकों का सरकारीकरण हुआ तब देश में केवल 1800 ग्रामीण शाखाएं थीं. लेकिन 40 साल बाद भी इस गिनती में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ. 2009 में बैंकों की गांव में सिर्फ 31 हज़ार शाखाएं ही स्थापित हो सकीं. यानी भारत के एक बहुत बड़े हिस्से में बैंकिंग व्यवस्था आज भी नहीं है.
मित्रों, सहाराश्री, केडी सिंह जैसों ने इन्हीं गांव और गरीबों के बीच चिट् फंड का धंधा शुरू किया. गांव गांव अपने एजेंट भेजकर लाखों गंगू तेलियों से 10-10 से लेकर 100-100 रूपए तक रोजाना खींचे और राजा भोज का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दिया.

इन्ही हज़ारों गांव और कस्बों में इनकी मदर कंपनियों का असली बेस अभी भी है. इन बड़ी चिट फंड कंपनियों ने वित्त मंत्रलाए के भ्रष्ट अफसरों को मिलाकर क़ानून को कवच बनाया और रिश्वत की तलवार से बेईमानों के सर कलम कर दिये. ये ना कोई उत्पादन करते हैं और नहीं किसी उत्पाद की मार्केटिंग. सिर्फ गांव गांव हर गरीब से रोज पैसा लेकर चिट फंड का खेल खेला जाता है. इधर हम और आप टमाटर और प्याज में उलझे हैं और उधर ये छदम चिट् फंड कंपनियां किश्तों में देश लूट रही हैं. जय हो रिपब्लिक ऑफ चिकन की.

आजतक न्यूज चैनल में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा के फेसबुक वॉल से.

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