छोटे-मोटे न्यूज चैनलों की कथा निराली है. एक छोटे न्यूज चैनल में चैनल चलाने की जिम्मेदारी युवा मालिक ने अपने गर्लफ्रेंड के हाथों सौंप दी है. मालिक की ये गर्लफ्रेंड महोदया चैनलों से लोगों को निकालने तक का काम करती हैं. साथ ही, ये कोशिश करती हैं कि बाहर की दुनिया में भी इनके हाथों निकाले गए कर्मचारियों को कोई जगह न मिले. इसके लिए पूरी रणनीति तैयार की जाती है और महिलाओं के चरित्र पर लांछन तक लगाया जाता है. पुरुषों की योग्यता पर उँगली उठाई जाती है.
बास की गर्लफ्रेंड महोदया पावर पाकर खुश हैं और बॉस उन्हें पाकर मगन हैं. गर्लफ्रेंड महोदया ने अब तक करीब 5 लड़कियों और दो लड़कों की चैनल से छुट्टी कर दी. इसके पीछे महज एक वजह है कि निकाले गये सभी लोगों ने महोदया के इशारों पर नाचने से इनकार कर दिया था. अभी कुछ अन्य लोग भी निशाने पर हैं.
इस छोटे चैनल में इन दिनों पुरुषों में सिर्फ एक शख्स की पूछ है जिसे हिंदी में एक लाइन लिखनी नहीं आती लेकिन वह वहाँ शिफ्ट इंचार्ज और बतौर एंकर कार्यरत है. कुछ और भी हैं गर्लफ्रेंड महोदया को अपने इशारों पर नचा रहे हैं. कहते हैं चैनल शालीनता से चल रहा है लेकिेन इसमें मलिनता ही ज्यादा नजर आ रही है. चैनल को अब तक यथास्थित में बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाने वाले दो पत्रकारों को हाशिए पर डाल दिया गया है. इन सारी परिस्थितियों से यहां कार्यरत सभी लोग वाकिफ हैं लेकिन खामोशी से हर दर्द को सहना इनकी आदत बन गयी है. (कानाफूसी)





