हिंदुस्तान के कर्वी स्टाफ रिपोर्टर शेखर द्विेदी ने जनपक्षधर पत्रकारिता की धज्जियां उड़ा दी है. बात पिछले महीने 19 जून की है. सीएम अखिलेश यादव चित्रकूट के कर्वी मुख्यालय आते हैं. यहां वह कई योजनाओं का शिलान्यास करते है. जैसे कि मानिकपुर और शिवरामपुर के आईटीआई संस्थान का लोकार्पण. अखिलेश ने ये जो दो लोकार्पण किए, इन्हीं दोनों का लोकार्पण अपनी सरकार में मायावती ने 12 नवंबर 2011 को ही कर दिया था. मतलब जिला प्रशासन ने सीएम को जूठन परोस दिया.
खैर यह खेल क्यों हुआ, इसका जवाब तो जिला प्रशासन ही देगा. अहम बात यह है कि यह खबर मुख्यालय की सारी मीडिया को हो गई. प्रशासन को पता लगा तो सांसें फूल गई. फिर क्या था, मीडिया को दबाव भी मिला और लालच भी. कुछ बिक गए, कुछ नहीं. मसलन अमर उजाला, दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, डीएनए, जनसंदेश टाइम्स सहित कई और ने चार-चार कालम में खबर दमदारी से छाप दी. हिंदुस्तान का स्टाफ रिपोर्टर तो पूरी खबर ही निगल गया. हिंदुस्तानी रिपोर्टर ने डीएम को खुश करने के चक्कर में यहां तक छाप दिया कि ''सीएम के कार्यक्रमों पर डीएम की रही पैनी निगाह''.
उधर जूठन शिलान्यास की खबर छपने पर प्रशासन ने उजाला और सहारा को प्रेस नोट देने पर पाबंदी लगा दी, जो अब भी जारी है. ऐसा नही है कि यह मामला सिर्फ कर्वी में सुर्खियों में है. कानपुर के लगभग सभी अखबारों के जिम्मेदारों के संज्ञान में भी है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





