दोस्तों, कोई कांग्रेस को महान बता रहा है तो कोई नरेंद्र मोदी को। कोई मायावती को महान बता रहा है तो कोई मुलायम सिंह यादव को। आखिर इन महान नेताओं ने देश के आम आदमी के सुख के लिए क्या किया है? जिस देश में प्याज चालीस रुपए बिक रहा हो। आलू १५ रुपए बिक रहा हो, वहां का गरीब खाएगा क्या और पहनेगा क्या?
है किसी नेता की हिंम्मत कि कहे कि वह देश की सड़ चुकी व्यवस्था को बदल देगा और लोकतंत्र की नई परिभाष गढ़ेगा? अरे यार पुलिस एक्ट अंग्रेजों के जमाने का आज भी चल रहा है। उसमें बदलाव की बात कोई नहीं करता। यह कानून अंग्रेजों ने दमन के लिए बनाया था। वह आज भी चल रहा है। उसे क्यों नहीं बदला गया। इस पर कोई नेता क्यों नहीं बोलता?
आप सौ प्रतिशत विदेशी पूंजी निवेश की इजाजत दे कर किसे फायदा पहुंचा रहे हैं? आम आदमी को या व्यापारियों को? क्या किसानों की सुनने वाला कोई है? कुछ लोग अपने मन से जेनेटिकली माडिफाइड बीज की बात करते है। इस पर किसानों की कोई राय नहीं ली गई।
आप इंग्लैंड व अमेरिका में जेनेटिकली माडिफाइड बीजों के खिलाफ आवाज सुनिए। तब आपको पता चलेगा कि इन बीजों से कोई फायदा नहीं होने वाला औऱ न ही इससे मनुष्य का स्वास्थ्य ही बनता है। पैदावार भी नहीं बढ़ती, बस सिर्फ दिखावा भर है ताकि किसी कंपनी को फायदा पहुंच सके। ऐसे बीजों को बाजार में इसलिए उतारा जाता है कि कुछ खास विदेशी या देसी कंपनियों को फायदा हो। इसके पीछे एक रैकेट काम करता है।
किसान आत्महत्या करते हैं। खेती में उन्हें कोई फायदा नहीं होता। जब बारिश अच्छी होने की भविष्यवाणी होती है तो यह खबर आठ बार घुमा फिरा कर कुछ दिनों के अंतराल पर छपती है। कभी किसी नेता के बयान के बहाने तो कभी किसी और बहाने। किसानों का इंटरव्यू किसी अखबार में पढा है आपने? किसी अन्य साधारण व्यक्ति का इंटरव्यू पढ़ा है आपने? अरे यार गरीबों और जरूरतमंदों का इंटरव्यू लो। तब तो कहा जाएगा कि हमारा देश कितना उदार लोकतांत्रिक है।
रुपए का भाव लगातार गिर रहा है, इससे महंगाई बढ़ रही है और आम आदमी कराह रहा है। इसे मनमोहन सिंह का करिश्मा कहेंगे या वित्त मंत्री का? कांग्रेस भ्रष्ट औऱ नकारा है। भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र मोदी ने कभी कहा है कि मैं अगर प्रधानमंत्री बना तो इस विकट स्थिति से छुटकारा दिला दूंगा। वे सिर्फ कांग्रेस पर हमले कर रहे हैं। उनका अपना एजेंडा क्या है? क्या वे इस देश की सड़ और दुर्गंध मारती व्यवस्था को बदलेंगे?
अगर बदलने का वादा करें तो सबसे पहले मैं उन्हें वोट दूंगा। लेकिन क्या वे अकेले दम पर व्यवस्था को बदल पाएंगे जिसमें कोई प्रधानमंत्री बने, किसी पार्टी का राज हो (केंद्र में राज्यों में) भ्रष्टाचार और कुप्रबंध चरम पर है? कृपया इन राजनेताओं की ढोल न पीटें। इनका जयकारा न करें। यदि ये व्यवस्था नहीं बदल पा रहे हैं।
लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं. जनसत्ता, कोलकाता के साथ लंबी पारी खेल चुके हैं.





