रीजनल न्यूज चैनलों ने अपने को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए लड़ाई की शुरुआत कर दी है. इसकी अगुवाई ईटीवी और इसके हेड जगदीश चंद्र कर रहे हैं. इनका साथ अन्य चैनलों के कर्ताधर्ता भी दे रहे हैं. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को ईटीवी हिंदी और उर्दू चैनल्स के हेड जगदीश चंद्र, सहारा इंडिया मीडिया के हेड स्वतंत्र कुमार मिश्रा, इंडिया न्यूज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राकेश शर्मा और साधना न्यूज चैनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राकेश शर्मा की तरफ से संयुक्त हस्ताक्षरों वाला एक पत्र भेजा गया है.
इस पत्र में रीजनल न्यूज चैनलों को प्रिंट के बराबर ही विज्ञापन देने की मांग की गई है और प्रिंट की तरह ही कैटगराइजेशन करने की डिमांग की गई है. पूरा पत्र नीचे प्रकाशित किया जा रहा है. ईटीवी की तरफ से छत्तीसगढ़ सरकार से दैनिक भास्कर के बराबर विज्ञापन राशि की मांग की गई जिसे सरकार ने देने से इनकार कर दिया. इस घटनाक्रम के करीब छह महीने बाद जब ईटीवी ने रमन सिंह के परिजनों के घपले-घोटाले की कोई खबर दिखाई तो छत्तीसगढ़ सरकार ने ईटीवी पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए अघोषित तरीके से चैनल का प्रसारण राज्य में रुकवा दिया. पूरा मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है.
ईटीवी की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं. उधर, छत्तीसगढ़ सरकार ने भी कमर कसते हुए सुप्रीम कोर्ट में ईटीवी को मुंहकी दिलाने की तैयारी की है. छत्तीसगढ़ सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ईटीवी के लोग बिलो द बेल्ट वार कर रहे हैं. विज्ञापन पाने के लिए न सिर्फ रमन सिंह का नाम बदनाम कर रहे हैं बल्कि राज्य के प्रमुख सचिव बैजेंद्र कुमार के दामन पर भी कीचड़ बिखेर रहे हैं. अफसरों की परसनल बातचीत को टेप करके प्रसारित कर देना, प्रमुख सचिव को टारगेट बनाकर उलजुलूल बातें प्रसारित करना, मार्केटिंग के मुद्दों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर मसले को गलत ढंग से प्रचारित करना… ऐसी कई चीजें हैं जिसके कारण ईटीवी से छत्तीसगढ़ सरकार नाराज है.
उधर, राज्य के कुछ पत्रकारों का कहना है कि प्रमुख सचिव बैजेंद्र कुमार ने जिस साहस के साथ ईटीवी के दबावों और ब्लैकमेलिंग का मुकाबला किया है, वह काबिलेतारीफ है. आज के दौर में आमतौर पर कोई भी अफसर मीडिया हाउसों के सामने नतमस्तक हो जाता है लेकिन बैजेंद्र कुमार ने पेड न्यूज की डिमांड को खारिज कर साहस का परिचय दिया. इन पत्रकारों का कहना है कि ईटीवी पेड न्यूज की मांग कर रहा है. वह सरकार से संबंधित सकारात्मक खबरें दिखाए जाने का पैसा मांग रहा है. उधर, ईटीवी के लोगों का कहना है कि ईटीवी की अगुवाई में न्यूज चैनलों ने अपने हक की लड़ाई शुरू की है जिसे कुछ अफसर इगनोर करना चाह रहे हैं. न्यूज और विज्ञापन के मसले को अलग अलग रखा गया है. मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने के करीब छह महीने बाद उनके खिलाफ आई एक खबर को दिखाया गया जो कि विरोधी पार्टी के नेता के बयानों पर आधारित है. इसमें कुछ गलत नहीं है.
फिलहाल यहां वो पत्र दिया जा रहा है जो चैनलों की तरफ से सीएम को भेजा गया… इस मसले पर अगर आपका कोई व्यूप्वाइंट हो तो लिख सकते हैं, कमेंट के रूप में या फिर अलग से आर्टिकल के रूप में….






