भदोही। गाड़ी पर लाल बत्ती लगाकर घूम रहे आशाराम बापू की खबर बनाने गए न्यूज चैनल के पत्रकार रोहित गुप्ता से आशाराम बापू और उनके शिष्यों द्वारा मारपीट के मामले में नया मोड आ गया है। पुलिस ने इस मामले में आशाराम बापू और उनके शिष्यों के उपर मुकदमा दर्ज तो कर लिया था पर बाद में विवेचना के दौरान क्लीन चिट दे दिया था लेकिन पत्रकार रोहित गुप्ता के द्वारा क्लीन चिट के विरोध में न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था जिसके बाद कोर्ट ने फिर से आशाराम के उपर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
दरअसल इस मामले में बाजार में जो चर्चा का महौल है उसके मुताबिक जब रोहित गुप्ता को आशाराम बापू और उनके शिष्यों ने मारापीटा था तो काफी संख्या में पत्रकारों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया और आशाराम बापू के और उनके शिष्यों के उपर गोपीगंज थाने में मुकदमा दर्ज हो गया। मुकदमें के बाद आंदोलन छेडने वाले कुछ पत्रकार शांत हो गए और पुलिस ने अपनी मनमानी कर बापू और उनके शिष्यों को क्लीन चिट दे दिया।
इस मामले में चर्चा है कि कुछ पत्रकारों ने आशाराम के शिष्यों से आवाज न उठाने के लिए मोटी रकम वसूल किया था और हल्ला मचा दिया कि रोहित ने पैसा खाकर मामला कमजोर कर दिया। लेकिन सच सबके सामने है कि रोहित ने कोई पैसा नहीं खाया और अपनी लड़ाई लड़ता रहा जिसका परिणाम सबके सामने है। यह खबर अखबारों में छपी पर चैनलों पर नहीं चली जिससे यह लग रहा है कि भदोही इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार इस फैसले से खुश नहीं हैं।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





