Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

जब ओम थानवी, हरिवंश, राहुल देव पहुंचे अमर गायक कुमार गंधर्व के घर ‘भानुकुल’

Om Thanvi : इंदौर यात्रा में एकाधिक तीर्थ यात्राओं सुख मिला। पहला: इंदौर प्रेस क्लब द्वारा महान संपादक राहुल बारपुते की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। प्रभाष जोशी और राजेंद्र माथुर उन्हीं के साथ काम करते हुए आगे बढ़े थे। दूसरा: देवास गए, अमर गायक कुमार गंधर्व के घर 'भानुकुल'। कोई पंद्रह साल बाद। तब परिवार साथ था।

Om Thanvi : इंदौर यात्रा में एकाधिक तीर्थ यात्राओं सुख मिला। पहला: इंदौर प्रेस क्लब द्वारा महान संपादक राहुल बारपुते की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। प्रभाष जोशी और राजेंद्र माथुर उन्हीं के साथ काम करते हुए आगे बढ़े थे। दूसरा: देवास गए, अमर गायक कुमार गंधर्व के घर 'भानुकुल'। कोई पंद्रह साल बाद। तब परिवार साथ था।

इस बार हम तीन मित्र थे, राहुल देव और हरिवंश समेत। कुमारजी की पत्नी वसुंधराजी ने हम पर खूब स्नेह बरसाया। उनकी बेटी कलापिनी, पोता भुवनेश, पड़पोता अलख निरंजन, भुवनेश की पत्नी उत्तरा (मशहूर चित्रकार एनएस बेंद्रे की पौत्री) सब इतने आत्मीय निकले कि कब शाम हो गई, पता नहीं चला। कलापिनी और भुवनेश अब खुद बहुत अच्छा गाते हैं, देश-विदेश में कार्यक्रम देकर कुमारजी की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।

हम तीन-तिलंगे 'संपादक' कुमारजी के अपने कमरे में जाजम पर देर तक बैठे। इस कमरे में कुमारजी रियाज करते थे, यहीं सोते थे। इस कमरे को अब एक आश्रम या स्मृति-स्थल की आभा से संजो दिया गया है। कुमारजी की दुर्लभ तस्वीरें, उपकरण, तमगे और अन्य सम्मान, मच्छरदानी वाली चारपाई …

एक और यादगार: अपूर्व भोजन। सबसे निराला था भुट्टे का कीस और पेठे की खीर। इस तरह खाते चले गए कि कुछ कहा नहीं जा सका। दिल्ली पहुंचकर ही कलापिनीजी को कहा कि वाह क्या भोजन था!

कुमार गंधर्व का कमरा। उनका रियाज यानी उपासना कक्ष। जाजम पर राहुल देव, कलापिनी कोमकली, ओम थानवी और हरिवंश। यह तसवीर भुवनेश कोमकली ने खींची। (तस्वीर और कैप्शन ओम थानवी के फेसबुक वॉल से)

कुमार गंधर्व का कमरा। उनका रियाज यानी उपासना कक्ष। जाजम पर राहुल देव, कलापिनी कोमकली, ओम थानवी और हरिवंश। यह तसवीर भुवनेश कोमकली ने खींची। (तस्वीर और कैप्शन ओम थानवी के फेसबुक वॉल से)

कुमारजी के घर में उनका संगीत परसों नहीं बज रहा था। पर हमें सुनाई दे रहा था। यों घर का चप्पा-चप्पा सात्विक और संगीतमय जान पड़ता था; बरामदे में जब कुमारजी के प्रिय झूले पर वसुंधराजी आ बैठीं तो मुझमें 'त्रिवेणी' का भजन जैसे सस्वर उतर आया: निर्भय निर्गुण गुण रे गाऊंगा! यह भजन कुमारजी और वसुंधराजी ने मिलकर गाया था। उसकी गूँज मेरे मन में ये पंक्तियाँ लिखते वक्त भी बनी हुई है।

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...