श्रीमान मनमोहन सिंह जी, माननीय प्रधानमंत्री, भारत, विषय: उत्तराखंड की केदारनाथ त्रासदी (दिनांक 16-17 जून 2013) में सेना के द्वारा सुरक्षित बचाने (रेस्क्यू) के बावजूद भी मेरी माताजी श्री मति गीता स्वर्णकार की गुमशुदगी के बारे में.. महोदय, मेरे पिताजी डा. प्यारे लाल स्वर्णकार, माताजी श्रीमती गीता स्वर्णकार, अंकल लखन लाल शर्मा और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती विमला शर्मा दिनांक 09 जून 2013 को चारधाम की यात्रा पर गए थे, जिनसे हमारा अंतिम बार मोबाइल पर संपर्क दिनांक 15 जून की रात्रि को हुआ था, उस समय वे केदारनाथ में थे।
16 -17 जून को केदारनाथ में आई देवीय आपदा के बाद दिनांक 21 जून को जंगल-चट्टी (केदारनाथ) से हेलीकॉप्टर द्वारा रेस्क्यू हुवे अनेको लोगो ने उन्हें पहचाना और बताया कि मेरे चारों परिजन दिनांक 21 जून तक जंगल-चट्टी (केदारनाथ) में स्वस्थ अवस्था में थे, एवं वे सभी हेलिकॉप्टर से गिराए गए खाने को मिलकर खाते थे। उन्होंने ये भी बताया कि चूँकि मेरे चारो परिजन एकदम स्वस्थ थे, अत: उन्हें एवं अन्य स्वस्थ लोगो को आर्मी वाले पेदल सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे।
इन सभी प्रत्यक्षदर्शियॊ की बात का प्रमाणीकरण IBN-CNN channel की 21 जून की विडियो क्लिप से होता है, जिसमें मेरी माताजी श्रीमती गीता स्वर्णकार को रेस्क्यू के बाद स्वस्थ अवस्था में आर्मी के जवानों द्वारा पैदल ही कहीं सुरक्षित स्थान पर ले जाते हुए दिखाया गया है। कृपया स्वस्थ अवस्था में आर्मी के द्वारा सुरक्षित बचाई गई मेरी माताजी की पिक्चर और IBN-CNN चैनल की वीडियो क्लिप देखिये:

व्यक्तिगत एवं राजस्थान सरकार के प्रयासों से हमें पता चला कि ये 5-सिक्ख़ रेजिमेंट के जवान मानवेन्द्र सिंह और सुरेन्द्र सिंह हैं, जो मेरी माताजी को रेस्क्यू करके ला रहे हैं। ये वीडियो क्लिप सोनप्रयाग का है, जहा से जिला प्रशासन के लोग बचाये गए सभी लोगों को गाड़ियों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर भेज रहे थे। पर अभी तक मेरी माताजी श्रीमती गीता स्वर्णकार का कोई पता नहीं चला है। मैं स्वयं गुप्तकाशी और फाटा जाकर आया हूं, जहा के अधिकारी एवं प्रशासन के लोग न तो मेरी माताजी के बारे में बता पा रहे हैं और न ही ये बताने लायक हैं कि मेरी माताजी को किस गाड़ी से किधर भेजा है। उनके नकारात्मक और अमानवीय जवाब भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ है।
मेरी आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि –
1. शीघ्रातिशीघ्र मेरी माताजी को दूंढने का आदेश दे। यह पता लगाने का आदेश भी दे कि स्वस्थ अवस्था में रेस्क्यू होने के बाद भी मेरी माताजी प्रशाशन की लापरवाही से कहा चली गई।
2. शीघ्रातिशीघ्र उच्च स्तरीय जाँच कराये, जिससे मेरी माताजी एवं अन्य लोगो का पता चल सके, जिसको आर्मी ने रेस्क्यू तो कर दिया, पर अभी तक उत्तराखंड सरकार की लापरवाही से वे अपने घर नहीं पहुचे है।
महोदय, कृपया करके मेरे निवेदन को गंभीरता से ले। आपके द्वारा कार्यवाही न होने की दशा में इस चिंताजनक स्थिति में मेरी प्राकृतिक मृत्यु (natural death) निश्चित है। (क्यूंकि मेरे लिए ये बहुत दुखद और अविश्वनीय है कि मेरी माताजी को स्वस्थ अवस्था में रेस्क्यू किया गया था, पर अभी तक वे घर नहीं पहुची ).
With regards
Dr. Vineet Soni
MSc, PhD, PostDoc (Switzerland), FBS, FLS
111/305, Agarwal Farm,
Mansarovar, Jaipur,
Rajasthan, INDIA
Mobile: 09828309537
Email: [email protected]





