दैनिक जागरण ग्रुप के डिप्टी एडीटर-एचआर डॉ उपेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वे शीघ्र ही दैनिक ट्रिब्यून समूह के इनपुट हेड बन कर चंडीगढ़ जा रहे हैं। वे गुड़गांव, चंडीगढ, बठिंडा और जम्मू से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून के सीएनसी (चीफ न्यूज कोआर्डिनेटर) के रूप में लगभग छह वर्ष बाद खबरों की मुख्य धारा में वापसी कर रहे हैं। दिसंबर 2007 में दैनिक जागरण समूह ने एडीटोरियल एचआर का पृथक विभाग बनाया था और उस समय जा़गरण की इलाहाबाद यूनिट के संपादकीय प्रभारी डॉ उपेंद्र को कंट्रीहेड के रूप में प्रोन्नति देकर इस विभाग का मुखिया बनाया गया।
आनलाइन परीक्षा आधारित केंद्रीयकृत भर्ती व्यवस्था, आनलाइन एप्रेजल और एप्रेजल आधारित प्रोन्नति व इंक्रीमेंट, चार वर्ष से लगातार जारी दैनिक अंतर्समूह कंटेंट व विजुअल स्पर्धा और जिलों से राष्ट्रीय मुख्यालय तक संपादकीय प्रशिक्षण नेटवर्क के लिए डॉ उपेंद्र का कार्यकाल याद किया जाएगा।
किंतु इन सब के बीच वे खुद सक्रिय पत्रकारिता से दूर होते गए, जो शायद डॉ उपेंद्र को कसकने लगा था। सितंबर 2010 में अमेरिका टूर के दौरान स्वामी विवेकानंद के जीवन के कुछ नए तथ्य उजागर करने और अमेरिकी खेतीबाड़ी की झलक देने वाली रिपोर्टस को छोड़ दिया जाए तो बीते पांच वर्षों के दौरान उनकी लेखनी मौन ही रही। दैनिक जागरण के साथ डॉ उपेंद्र की यह दूसरी पारी थी।
भारतीय जनसंचार संस्थान के १९८८ (1988) बैच टापर के रूप में उन्होंने दैनिक जागरण के तत्कालीन संपादक नरेंद्र मोहन का ध्यान आकर्षित कराया था, फलस्वरूप दैनिक जागरण लखनऊ में उपसंपादक के तौर पर उपेंद्र पाण्डेय ने पत्रकारिता की शुरुआत की, फैजाबाद निवासी होने के कारण अयोध्या और अमेठी उनकी रिपोर्टिंग उनकी विशेषता बने।
1992 के अयोध्याकांड से उपजी लोकप्रियता भुनाने के लिए जागरण ने फैजाबाद से पहले आंचलिक संस्करण की शुरुआत की तो उपेंद्र पाण्डेय को ब्यूरो चीफ के रूप में फैजाबाद भेज दिया गया। अयोध्या प्रकरण की आंच धीमी पड़़ी तो श्री पाण्डेय रॉकफेलर फाउंडेशन और यूएसएड की स्कालरशिप पर दिल्ली चले गए। वहां से पुनः पत्रकारिता में लौटे तो डॉ उपेंद्र बनकर। 1997 में कुबेर टाइम्स, 1999 में अमर उजाला चंडीगढ, 2002 में हिंदुस्तान की लांचिंग से जुड़़े रहे डॉ उपेंद्र ने 2006 में इलाहाबाद संस्करण के संपादकीय प्रभारी के रूप में पुनः दैनिक जागरण वापसी की।





