Nutan Thakur : मैंने और अधिवक्ता अशोक पाण्डेय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अल्तमश कबीर से जुड़े उनके आखिरी दिन के एक फैसले की खबर पहले लीक होने, गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भास्कर भट्टाचार्य को अन्येतर कारणों से सुप्रीम कोर्ट में चयनित नहीं करने और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम पर एक जज को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त करने का गलत दवाब बनाने आदि के आरोपों के सम्बन्ध में उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराये जाने की मांग की है.
कल (18 जुलाई) प्रातः 8:36 बजे “बार एंड बेंच” नामक वेबसाईट पर सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन के छपे लेख “इंटू द डार्कनेस” में कहा गया था कि इस बात की बहुत चर्चा है कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिला सम्बंधित निजी कॉलेजों की अपील में फैसला इन कॉलेजों के पक्ष में जाएगा और यह कहा जाएगा कि मेडिकल काउन्सिल ऑफ इंडिया का इस सम्बन्ध में कोई क्षेत्राधिकार नहीं है, यद्यपि जस्टिस दवे का फैसला इससे अलग होगा.
हमने दिन में करीब 11 बजे सुनाये गए फैसले में ठीक वही बात होने को बहुत गंभीर बताते हुए इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट के एक अवकाशप्राप्त चीफ जस्टिस, प्रशांत भूषण जैसे प्रतिष्ठित अधिवक्ता और अन्ना हजारे जैसे समाजसेवी की एक स्वतंत्र कमिटी द्वारा कराये जाने की मांग की है.
सोशल एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट डा. नतून ठाकुर के एफबी वॉल से.






