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संपादक के रवैये के चलते हिन्दुतान आगरा का एक और विकेट गिरा

हिन्दुस्तान आगरा के संपादक पुष्पेन्द्र शर्मा के तानाशाही रवैये से परेशान हिन्दुस्तान आगरा प्लस के एक और रिपोर्टर ने इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले कई रिपोर्टर इनके व्यवहार से परेशान होकर इस्तीफा दे चुके हैं. हिन्दुस्तान आगरा प्लस के रिपोर्टर अश्वनी भदौरिया ने इस्तीफा देकर नई पारी राजस्थान पत्रिका जयपुर के साथ शुरू की है.

हिन्दुस्तान आगरा के संपादक पुष्पेन्द्र शर्मा के तानाशाही रवैये से परेशान हिन्दुस्तान आगरा प्लस के एक और रिपोर्टर ने इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले कई रिपोर्टर इनके व्यवहार से परेशान होकर इस्तीफा दे चुके हैं. हिन्दुस्तान आगरा प्लस के रिपोर्टर अश्वनी भदौरिया ने इस्तीफा देकर नई पारी राजस्थान पत्रिका जयपुर के साथ शुरू की है.

इससे ठीक पहले परेशान चल रहे हिन्दुस्तान प्लस के ही रिपोर्टर विशाल सिंह इस्तीफा दे चुके हैं. विशाल को संपादक द्वारा सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करने पर वह तनाव में चल रहे थे. एक महीने पहले हिन्दुस्तान के क्राइम रिपोर्टर श्यामवीर सिंह ने संस्थान को गुडबाय बोलकर राजस्थान पत्रिका जयपुर का दामन थाम लिया है. श्यामवीर वहां भी क्राइम रिपोर्टर ही हैं. श्यामवीर सिंह संपादक पुष्पेन्द्र शर्मा के मीटिंग में किए जाने वाले गलत व्यवहार और सिटी इंचार्ज मनोज मिश्रा के पक्षपातपूर्ण रवैये से काफी समय से परेशान चल रहे थे. संपादक और सिटी इंजार्ज की जुगलबंदी ने यह सारा खेल दैनिक जागरण से लाए गए अपने खास राहुल गुप्ता को सिटी रिपोर्टिंग में शामिल करने के लिए किया.

खास योजना के तहत श्यामवीर सिंह को परेशान करना शुरू किया गया ताकि श्यामवीर या तो क्राइम छोड़ दे या संस्थान. श्यामवीर के जाते ही राहुल गुप्ता को क्षेत्रीय डेस्क से उठाकर सीधे सिटी रिपोर्टिंग में क्राइम रिपोर्टर बना दिया गया वह भी प्रमोशन के साथ. एडीटोरियल में सभी लोगों के इंक्रीमेंट के लेटर आने के बाद राहुल गुप्ता का लेटर दोबारा भेजा गया था इसके बाद राहुल को अलग से प्रमोशन का लेटर थमाया गया.

एटा के तेजतर्रार ब्यूरो चीफ अनुज शर्मा जो वहां के दबंग माफियाओं से लोहा ले रहे थे, को पुष्पेन्द्र शर्मा के कारण ही इस्तीफा देना पड़ा. इन्हीं पुष्पेन्द्र शर्मा के सिर्फ एक साल के आगरा संस्करण के कार्यकाल में ही कई अन्य पत्रकार जैसे राघवेन्द्र दैनिक जागरण बरेली और योगेश्वर अमर उजाला गोरखपुर का रुख कर चुके हैं. वहीं अपने 15 साल के पत्रकारिता कैरियर में छह साल हिन्दुस्तान आगरा को दे चुकीं हिन्दुस्तान की एकमात्र स्टाफर महिला रिपोर्टर को जबरन क्षेत्रीय डेस्क पर बैठा दिया गया. और तो और इस साल उनका इंक्रीमेंट भी नहीं होने दिया.

उन्होंने आलाकमान को सारी बातों से अवगत करा दिया है. कई वरिष्ठ और प्रमुख संवाददाता स्तर के लोग मनोज मिश्रा को सिटी इंचार्ज बनाने से अपने को उपेक्षित और प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं लेकिन आगरा वासी होने के कारण वह यहां से छोड़ कर भी नहीं जाना चाहते लेकिन इनमें से भी बाहर के कुछ लोगों ने संपादक को एक साल और न झेलकर नौकरी तलाश करना शुरू कर दिया.

हाल में ही एक तेजतर्रार नवोदित रिपोर्टर को सिर्फ अपना अहम पूरा करने के लिए रिपोर्टिंग टीम से हटाकर क्षेत्रीय डेस्क पर भेज दिया गया, वह भी नए ठिकाने की तलाश में है. यही हाल क्षेत्रीय डेस्क का भी है पूरी टीम को अच्छे इंक्रीमेंट के बाद सिर्फ दो पत्रकार जिन्होंने संपादक की चापलूसी करने से मना कर दिया था को इंक्रीमेंट नहीं दिया गया जबकि उनमे से एक क्षेत्रीय डेस्क के सेकेंड इंचार्ज भी हैं. अभी देखते रहिए संपादक और सिटी इंचार्ज की जुगलबंदी से परेशान कितने और पत्रकार हिन्दुस्तान आगरा छोड़ते हैं.

आगरा से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर उपरोक्त खबर के तथ्यों में कमी या बेसी नजर आए तो भड़ास तक अपनी बात नीचे दिए गए कमेंट बाक्स या फिर [email protected] के जरिए पहुंचा सकते हैं.

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