Pradyumna Yadav : सवर्णों ने इलाहाबाद में ऐतिहासिक नीचता का परिचय दिया है। मुझे नहीं पता था ये इतने बड़े नीच होते हैं और इस तरह की हरकते कर सकते हैं। कल शाम की सलोरी की घटना बता रहा हूँ। उच्च न्यायलय का फैसला आने के बाद ये सवर्ण जब वहाँ पहुंचे तो अपनी धौंस और गुंडई दिखाते हुए गरीब पिछड़े वर्ग के ठेले पर दूकान करने वालो के ठेले उलट-पलट दिया। उन्हें बाकायदा चिन्हित कर के पीटा गया।
हद तो तब हो गयी जब इन कुंठित लोगो ने जानवरों को भी नहीं बख्सा। शुक्ला मार्किट मे इन्होने ं एक डेरी वाले की दूकान में तोड़ फोड़ की। उसकी बाहर खड़ी गाड़ी भी तोड़ दी। और जब इस पर सुकून न मिला तो गाय-भैंसों को पथ्थरो से मार-2 कर घायल कर दिया। इन सब में भला उन निर्दोष मासूम जानवरों का क्या कसूर था? क्या वो पीसीएस की परीक्षा देते हैं? क्या वो इन सवर्णों को पछाड़ कर आगे निकल रहे हैं?
दूसरी बानगी देखिये कि जिस दूकान पर इन जाहिलो ने कृष्ण की फोटो देखी उसे यादव की दूकान समझ कर तोड़फोड़ की। अपनी सारी धार्मिकता ताख पर रख कर फोटो फाड़ डाले। दुकानदारों को भद्दी गालियाँ दी और उनसे बदतमीज़ी की। इसके अलावा इन्होने आयोग के सामने बैरीकेडिंग और पुलिस की घेराबंदी तोड़ दी। सिविल लाईन्स में दर्जनों बसों के सीसे तोड़ दिए । बिग बाज़ार पर पथराव किया। इन्होने प्राईवेट वाहनों को भी नहीं छोड़ा। इन कुंठितो ने करीब दर्जन भर वाहनों को तोड़ा और समाजवादी पार्टी की झंडा लगी दो गाडिओ को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। जगह-2 पुलिस वालों पर पथराव भी किया। विश्वविद्यालय कैम्पस में भी तोड़-फोड़ की गयी और पुलिस की जीपें भी तोड़ी गयी।
डायमंड जुबली हास्टल में रहने वाले छात्रनेता राघवेन्द्र यादव के रूम पर तोड़-फोड़ की गयी साथ ही लोहिया वाहिनी के अध्यक्ष निर्भय सिंह पटेल को पिटा गया और उनकी बोलेरो को क्षति ग्रस्त कर दिया गया।
इस अराजक स्थिति को नियंत्रित करने में एसपी सिटी शैलेश यादव ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभायी। लेकिन दलाल मनुवादी मिडिया ने शैलेश यादव को निशाना बनाते हुए अपनी खबरों में उनकी बुरी छवि पेश की। खबरों में उन्हें इस तरह पेश किया जैसे इन कुंठित छात्रो की तोड़-फोड़ सही थी और शैलेस जी का उन्हें रोकने के लिए उठाया गया कदम गलत।
मै सभी ओबीसी छात्रो से निवेदन करता हूँ की वो इन कुंठित और जाहिल सवर्णों की तरह किसी भी तरह का हिंसात्मक कदम न उठाये। वरना ये मनुवादी मिडिया जो शुरू से लेकर अब तक इस ताक में लगी हुई है की कब कोई ओबीसी छात्र अपना आपा खोये और कब ये कानून व्यवस्था के नाम का ा रंडीरोना शुरू कर दें। आप सावधान रहे और इन्हे निंदा का कोई अवसर न दें।
प्रदुम्यन यादव के फेसबुक वॉल से.





