Samar Anarya : इलाहाबाद में सवर्ण आरक्षण विरोधियों द्वारा बरपाये गए कहर से चौंकने की जरूरत नहीं है. इन बेहूदों ने 1989 में इससे भी ज्यादा नंगई की थी. पुराने लोगों से पूछिये- वे आपको तब के अध्यक्ष इंदु सिंह के नेतृत्व में लगाये गये छात्र कर्फ्यू के बारे में बताएँगे. इस बार सड़कों पर बहा दिया गया गरीब दूधवालों खून, तोड़ दिए गए ठेले, बर्बरता का शिकार हुई भैंसें- सब बुरा है पर यकीन करिए उस बार जैसा नहीं.
हाँ, एक चीज बदल गयी है. उस बार किसी को सजा नहीं हुई थी. होती भी कैसे, तब हर जगह इन्ही के चाचा बैठे थे. तब मंडल लाने की लड़ाई थी. अब मंडल आ गया है सो इस बार खबरों के मुताबिक़ कम से कम 22 हिंसक सवर्ण अपराधी नैनी सेन्ट्रल में हैं. इन बर्बरों की जमानत न होने देने के लिए लड़िये. ये किसी महान राजनीतिक आंदलन में नहीं बल्कि गरीबों पर जुल्म करके जेल गए हैं और इसकी सजा इन्हें मिलनी ही चाहिए. और एक बार सजा मिल गयी तो अगली बार निकलने का सोचने पर भी इन झुण्डवीरों के तिरपन कांपेंगे.
समर अनार्या के फेसबुक वॉल से.





