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फेसबुक और सोशल मीडिया के ‘गोयबल्स’ का शिकार होता रहता हूं : अजीत अंजुम

Ajit Anjum : फेसबुक और सोशल मीडिया में कुछ लोग हिटलर के प्रचार मंत्री डॉ. जोज़ेफ गोयबल्स की फिलॉसफी से प्रभावित होकर किसी के खिलाफ झूठा प्रचार करने के गुरेज नहीं करते …और इतनी बार, इतने तरीके से करते हैं कि लोग उसे सच मानने लगें ….( गोयबल्स की थ्यौरी – झूठ को इतनी बार ( सौ बार ) बोलो कि वह सच लगने लगे ) . मैं भी इसका शिकार गाहे – बगाहे होता रहता हूं …झूठी बातें , झूठे बयान , झूठी कहानियां बनाकर कहीं भी चिपका देते हैं और खुश होते हैं कि मैंने तो उनका काम लगा दिया ….सच कहू तो पहले कभी इसकी चिंता भी करता था …कई बार कोफ्त भी होती थी कि क्या है यार , बेसिर – पैर की बातें लिख दी गयी है..

Ajit Anjum : फेसबुक और सोशल मीडिया में कुछ लोग हिटलर के प्रचार मंत्री डॉ. जोज़ेफ गोयबल्स की फिलॉसफी से प्रभावित होकर किसी के खिलाफ झूठा प्रचार करने के गुरेज नहीं करते …और इतनी बार, इतने तरीके से करते हैं कि लोग उसे सच मानने लगें ….( गोयबल्स की थ्यौरी – झूठ को इतनी बार ( सौ बार ) बोलो कि वह सच लगने लगे ) . मैं भी इसका शिकार गाहे – बगाहे होता रहता हूं …झूठी बातें , झूठे बयान , झूठी कहानियां बनाकर कहीं भी चिपका देते हैं और खुश होते हैं कि मैंने तो उनका काम लगा दिया ….सच कहू तो पहले कभी इसकी चिंता भी करता था …कई बार कोफ्त भी होती थी कि क्या है यार , बेसिर – पैर की बातें लिख दी गयी है..

…लेकिन अब इतने गोयबल्स हो गए हैं कि उनके दुष्प्रचार की चिंता करना और सोचना छोड़ दिया है ….कभी – कभी तो इतना दिलचस्प झूठ होता है कि पढ़कर मजा भी आता है …..हंसी भी आती है …क्योंकि जो मैं बोलता नहीं , वो आप सुन लेते हैं . जो मैं सोचता नहीं , वो मेरी तरफ आप सोच लेते हैं. जो मैं लिखता नहीं , वो भी आप भी मेरी तरफ से पढ़ लेते हैं . जो देखता नहीं , वो भी कई बार आप मेरी नजरों से देख लेते हैं …..जो मैं कहना चाहता हूं , वो मेरे कहै बगैर आप भांप लेते हैं ….तो हे गोयबल्सो , पूर्वाग्रहों के प्रति आपकी निष्ठा और तत्परता को मेरा सलाम …यूं ही अपना काम करते रहिए…बहुत ताकत मिलती है आपके झूठे प्रचार और आपके ऐसे इरादों से …..लगे रहिए …शुभकामनाएं …..खुश रहिए…खुंदक के कारखाने में दुष्प्रचार की मंशा को तराशते रहिए ….यकींन मानिए कई बार जितना मजा आपको आता होगा , उससे ज्यादा मुझे आता है ….
( नोट – आप सच में विफल हैं, बेकार हैं … अगर ऐसे गोयबल्स आपके पीछे नहीं पड़े हैं )

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम के फेसबुक वॉल से.

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