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प्रवीण कुमार, लगता है तुम्हारी कोई निजी खुन्नस है इस पत्रकार से

प्रवीण कुमार तुमने किसी पत्रकार पर लगे मुकदमों की बानगी पेश कर क्या कहने का प्रयास किया है? क्या तुमने कभी फील्ड रिपोर्टिंग की है, वह भी बिना किसी लालच और भय के. अगर की है तो तुम बेहतर समझ रहे होगे कि मैं क्या लिखने जा रहा हूं. और अगर नहीं की है तो तुम पहले बड़े अखबार या चैनल में फील्ड रिपोर्टिंग कम से कम पांच साल करो फिर अनुभव करना कि किसी भी निर्भीक व इमानदार रिपोर्टर को क्या क्या झेलना पड़ता है.

प्रवीण कुमार तुमने किसी पत्रकार पर लगे मुकदमों की बानगी पेश कर क्या कहने का प्रयास किया है? क्या तुमने कभी फील्ड रिपोर्टिंग की है, वह भी बिना किसी लालच और भय के. अगर की है तो तुम बेहतर समझ रहे होगे कि मैं क्या लिखने जा रहा हूं. और अगर नहीं की है तो तुम पहले बड़े अखबार या चैनल में फील्ड रिपोर्टिंग कम से कम पांच साल करो फिर अनुभव करना कि किसी भी निर्भीक व इमानदार रिपोर्टर को क्या क्या झेलना पड़ता है.

मुकदमा तो बहुत मामूली बात है. अब जरा जिस पत्रकार पर तुमने अपनी भड़ास निकाली है, उस पत्रकार पर लगी आईपीसी की धाराओं पर भी ध्यान दो. अगर आईपीसी-सीआरपीसी का ज्ञान हो तो. वरना किसी वकील के पास जाना और पूछ लेना की इन धाराओं का मतलब कानूनी तौर पर क्या है.

प्रवीण कुमार, उस पत्रकार पर सिर्फ मारपीट करने, जान से मारने की कोशिश करने सहित बलवा और घर में घुसने जैसे मामूली आरोप हैं जिसे आप संगीन बता रहे हैं. इन धाराओं में अभी उस पत्रकार को आरोपित किया गया है. अदालत ने उसे सजा नहीं सुना दी है. मैं नहीं जानता वह पत्रकार कौन हैं फिर भी मौजूदा दौर में पैसे वाले, नेता, बड़े व्यापारी, पुलिस वाले अपनी खुन्नस निकालने व अर्दब में लेने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में तेजतर्रार पत्रकारों को मुकदमा लिखकर आतंकित कर रहे हैं. इसके जरिए वो मैसेज देते हैं कि मेरी तरफ मत देखना वरना ऐसे ही फंसा दिये जाओगे.

तो प्रवीण कुमार, किसी पर आपराधिक मुकदमे दर्ज भर हो जाने से उसे आप गलत नहीं कह सकते. लगता है कि आपकी कोई निजी खुन्नस उस पत्रकार से है, इसी कारण आप अचानक उसके खिलाफ हाथ धोकर पड़ गए.

राजेश वाजपेयी

वरिष्ठ पत्रकार
उन्नाव
[email protected]
 


मूल खबर–

अलीगढ़ में 'के. न्यूज' संवाददाता का आपराधिक इतिहास बता रहे हैं पत्रकार प्रवीण कुमार

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