Hareprakash Upadhyay : संपादक जी लोग एतवार के अपने अखबार में आधा-आधा पन्ना जो प्रवचन तानते हैं, उस पर न जाना रे भाई। जो सोचते हैं, ऊ बात ऊ लोग लिख दें तो समझो कि दंगा हो जाये, बहुत क्रांतिकारी विचार हैं हिन्दी के संपादकों के। कल एगो संपादक जी से औचक मिलना हुआ ( नाम में क्या रखा है, वैसे उन्होंने जो बताया, नाम न छापने की शर्त्त पर नहीं है)। उन्होंने मुझसे छूटते ही पूछा, तुम हिन्दू नहीं हो?
मैंने कुछ मजे में कुछ अपने स्वभाववश कहा कि जी बिल्कुल नहीं। संपादक जी गुस्सा गये, फिर पूछे, क्या तुम चमार हो? बस बस… बात मेरी समझ में आ गयी, ये जो गर्व से कहो हम हिन्दू हैं वाले हिन्दू भाई लोग हैं न, वे वंचित जातियों को हिन्दू तक नहीं मानते। संपादक जी बता रहे थे मुझे कि नरेंद्र भाई मोदी के खिलाफ मीडिया में घृणा प्रचार चल रहा है और इससे मोदी जी को जनता की और सहानुभूति मिल रही है। उनके अनुसार मोदी जी को पीएम बनने से कोई रोक नहीं सकता।
मैंने कहा कि पहली बात कि मोदी जी को उनके आडवाणी जी पीएम बनने नहीं देंगे सर और दूसरी बात, मोदी जी के खिलाफ मीडिया कहाँ हैं, वह तो उनके हर बयान को तान कर दिखा रहा है, उनके गुण का प्रकारांतर से रोज ही गान और बखान कर रहा है। उनके हर कहे को मीडिया ऐसी गंभीरता से ले रहा है, जैसे वे ही देश चला रहे हों। संपादक जी मेरी बात पर सहमत नहीं हुए, बहुते गुस्सा गये। मैंने सोचा, फूट लो बेटा, इसी में भलाई है और मैं ठेके की ओर निकल लिया। का गलत किया मैंने भाई?
वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार हरे प्रकाश उपाध्याय के फेसबुक वॉल से.





