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इलाहाबाद

इलाहाबाद में अब आरक्षण समर्थकों ने शुरू किया हंगामा, बवाल, उपद्रव

मुलायम सिंह यादव की पहल पर यूपीपीसीएस परीक्षा में लागू नई आरक्षण नीति को रद किए जाने के बाद आरक्षण समर्थकों ने बवाल शुरू कर दिया है. शनिवार की सुबह बड़ी संख्या में आरक्षण समर्थकों के एक गुट ने अल्लापुर के कैलाशपुरी इलाके में स्थित सपा के जिलाध्यक्ष पंधारी यादव के घर पर पथराव किया, जिससे वहां खड़ा पुलिस का एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया. पुलिस ने हंगामा कर रहे छात्रों को खदेड़ा तो वह सपा कार्यालय आ गए.

मुलायम सिंह यादव की पहल पर यूपीपीसीएस परीक्षा में लागू नई आरक्षण नीति को रद किए जाने के बाद आरक्षण समर्थकों ने बवाल शुरू कर दिया है. शनिवार की सुबह बड़ी संख्या में आरक्षण समर्थकों के एक गुट ने अल्लापुर के कैलाशपुरी इलाके में स्थित सपा के जिलाध्यक्ष पंधारी यादव के घर पर पथराव किया, जिससे वहां खड़ा पुलिस का एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया. पुलिस ने हंगामा कर रहे छात्रों को खदेड़ा तो वह सपा कार्यालय आ गए.

वहां उन्होंने मुलायम सिंह यादव मुर्दाबाद के नारे लगाए और नई आरक्षण नीति को फिर से बहाल करने की मांग की. आरक्षण समर्थकों के इस हुजूम ने जार्जटाउन थाना और सपा नेता रंजना बाजपेई के घर के सामने भी हंगामा करने की कोशिश की. सूचना पाकर आइजी आलोक शर्मा, प्रभारी एसएसपी अरुण कुमार पांडेय भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे.

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा में आरक्षण देने का विवादास्पद निर्णय वापस ले लिया है. इस व्यवस्था में आरक्षित वर्ग के छात्रों को प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के साथ इंटरव्यू में भी आरक्षण दिया गया था. अखिलेश सरकार के इस फैसले के बाद सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि इस फैसले से सपा सरकार एक खास वर्ग को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही थी. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में निलंबित फैसले से पहले ही अपना निर्णय जनता को सुना दिया. उन्होंने आयोग के चेयरमैन अनिल यादव को लखनऊ बुलाया था, जिसके बाद आयोग ने नए आरक्षण नियम को वापस ले लिया.

पिछले सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रों की अपील पर नई आरक्षण व्यवस्था पर रोक लगा दी थी. इसके साथ ही राज्य में 2011 की परीक्षा के सफल प्रत्याशियों के इंटरव्यू पर भी रोक लगाई गई थी. कोर्ट ने राज्य सरकार से जाति आधारित इस नई व्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा था. उसके बाद राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था. इसके विरोध में इलाहाबाद व अन्य जगहों पर छात्रों ने तोड़फोड़ की थी, जिसके बाद उनके खिलाफ मामले भी दर्ज किए गए थे. सरकार ने अब यह मुकदमे भी वापस लेने की घोषणा की है.

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