हाल में कुछ बड़े मीडिया हाउसेस ने सर्वे कराया. सर्वे के मुताबिक, कांग्रेस और भाजपा को मिलने वाली (लोकसभा) सीटों में सिर्फ 15 से 20 सीट का फासला है. भाजपा को महज़ 20 ज़्यादा. ये उन लोगों के मुंह पर तमाचा है, जो पूरे देश में मोदी की लहर बहने का दावा करते हैं. तमाम सर्वे बता रहे हैं कि देश की दो बड़ी पार्टियां (कांग्रेस और बीजेपी) 150 सीट भी नहीं पाएंगी. साथ ही UPA और NDA का कुनबा 200 के आंकडें को भी बमुश्किल छू पायेगा. यानी कुल 543 सीटों में से भाजपा 150 (लगभग एक चौथाई) का आंकडा भी ना छू पाए तो ये किस लहर और किस लोकप्रियता के दावे की बात हो रही है?
भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस पीछे हुई है, मगर इसका फायदा बीजेपी को कहां मिलता दिख रहा है? (सर्वे के मुताबिक़) कांग्रेस और बीजेपी के बीच 15-20 सीटों का बेहद कम फासला कभी भी पाटा जा सकता है, क्योंकि चुनाव अभी 8 महीने दूर है. अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या नरेंद्र मोदी का मीडिया मैनेजमेंट इतना तगड़ा है कि भाजपा को 150 सीट भी ना मिले और बात हर तरफ "मोदी की तथा-कथित आंधी" चलने की हो रही है? (सर्वे के मुताबिक) देश का महज़ 25% जनमानस मोदी की भाजपा को वोट दिखाई देता दे रहा है, और मीडिया इसे पूरे देश की सोच घोषित करता फिर रहा है.
देश के 4 दक्षिण-भारतीय राज्यों में भाजपा के खाता खुलने के आसार भी नहीं दिख रहे और नरेन्द्र मोदी का शानदार मीडिया मैनेजमेंट उन्हें सारे देश में लोकप्रिय करार दे रहा है! है ना मज़ाक की बात? पूर्वोत्तर भारत में भी बीजेपी का मामला सिफ़र है, मगर मोदी का गुणगान करने वाले इस से बे-खबर हैं! यूपी, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल में भी (सर्वे के अनुसार) क्षेत्रीय पार्टियों का वर्चस्व कायम रहेगा! ऐसे में मोदी हैं कहाँ? पूरब-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण में से महज़ उत्तर और पश्चिम से मिलती कुछ सीटें जीतने वाली पार्टी (भाजपा) और उसके समर्थक किस बात को लेकर मुंगेरीलाल के हसीं सपने बुन रहे हैं?
अब रहा सवाल मीडिया मैनेजमेंट का, तो मोदी और उनकी टीम इसमें माहिर है! मात्र 25 फीसदी वोट को काल्पनिक तौर पर 75% घोषित करवाने की तिकड़म में माहिर मोदी एंड मैनेजमेंट, इवेंट मैनेजमेंट या एडवरटाइजिंग कंपनी के सर्वेसर्वा हो सकते हैं मगर ज़मीनी हकीकत से दो-चार होने का माद्दा नरेन्द्र मोदी और मीडिया के उनके तथा-कथित सहयोगियों में नहीं है …जो….25 को 75 बताने का प्रचार करने में जुटे हैं ! मीडिया हाउस चलाने के लिए आर्थिक सहूलियतों की ज़रुरत होती है …हो सकता हो कि….25५ को 75 बताने का खेल एक गोपनीय समझौता हो , जो फिलहाल जगजाहिर नहीं हुआ है ! मगर हालिया सर्वेक्षण नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की बखिया उधेड़ने के लिए काफी हैं !
अजित सिंह की रिपोर्ट. संपर्क: 09594471363





