यशवंत जी पिछले दिनों भड़ास पर एक लेख पढ़ा था, प्रकाश हिंदुस्तानी ने लिखा था, शीर्षक था- हिंदी के रीजनल न्यूज चैनलों का एकमात्र काम अपने राज्य के मुख्यमंत्री की जय जय कार करना. पिछले दिनों मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज की जनआशीवार्द यात्रा के दौरान इसकी याद आ गई….
मध्यप्रदेश का पूरा मीडिया शिवराज की यात्रा के सामने नमस्तक हो गया….. इस तरह लाइव चला रहा था कि मानों प्रदेश की सबसे बड़ी खबर यहीं हो…. चुनाव आयोग पेड न्यूज की बात करता है, ये जो 5-6 घंटे लगातार लाइव चल रहा था बिना बात के राज्य सरकार की जय जयकार की जा रही थी… क्या ये पेड न्यूज की श्रेणी में नहीं आता….
सहारा…ईटीवी…जी मध्यप्रदेश और इंडिया न्यूज मध्यप्रदेश जैसे बड़े रीजनल चैनलों ने मुख्यमंत्री और 5-6 नेताओं का भाषण लाइव चलाया… बंसल न्यूज और ऐसे ही कुछ छोटे चैनलों ने कुर्सी और टेंट लगने से लेकर यात्रा खत्म होने तक ..शिवराज के रथ का पिछवाड़ा भी लाइव दिखाया…..सवाल यही है कि ये पत्रकारिता का कौन सा रूप है…..मध्यप्रदेश में सारे न्यूज चैनल शिवराज का गुणगान कर रहे हैं….साफ है कि इन्हे जनसंपर्क से पैसा मिल रहा है….खूब विज्ञापन दिए जा रहे है पर क्या इसका मतलब ये हो गया है कि रीजनल चैनल प्रदेश सरकार के गुलाम हो जाए….सिर्फ वही दिखाया जाए जो प्रदेश के मुख्यमंत्री को पसंद हो….
ट्राई कितने ही नियम बना ले कि 30 घंटे में 9 मिनट से ज्यादा विज्ञापन नहीं होना चाहिए पर मध्यप्रदेश के न्यूज चैनल कई बार इस तरह के आयोजन में मुख्यमंत्री के भाषण को घंटों लाइव चलाता है….तो क्या ये ट्राई ने नियमों का उल्लघन है….शिवराज की जन आशीर्वाद रैली को जिस तरह मप्र की मीडिया ने प्रस्तृत किया है वो बहुत शर्मनाक है….ये मजबूरी हो गई है रीजनल चैनल की अगर बीजेपी की जगह कांग्रेस की सरकार होती तो वी यही होता जो आज हुआ…. जिस तरह से रीजनल चैनलों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है उसी तरह से राज्यों में चाटुकारिता बढ़ती जा रही है….
अब चैनल का न्यूज हैड सरकार के प्रवक्ता जैसी बाते करता नजर आता है…सिर्फ राज्य सरकार के मंत्रियों के इंटव्यू लेना.. IAS और IPS से अफसरनामा करना…राज्य सरकार की तारीफ करना ये चैनल के न्यूज हैड का काम रह गया है….बाकी क्या चल रहा है चैनल में…कहां जा रही है पत्रकारिता इससे कोई लेना देना नहीं….
अभी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में थोड़ा समय बाकी है….पर चुनाव आते आते ये न्यूज चैनल पत्रकारिता को और शर्मसार करेंगे….ऐसे में चुनाव आयोग को चाहिए कि वो देखे किस नेता को कौन सा चैनल कितनी देर तक दिखा रहा है….क्यों कि यही पेड न्यूज है ….पैसे देकर टीवी पर दिखना…पैसे देकर मुख्यमंत्री का भाषण या आयोजन लाइव चलवाना…..राज्यों में पत्रकारिता के गिरते स्तर को अगर रोकना है तो सख्ती से इस चाटुकारिता को बंद करना होगा नहीं तो राज्यों में भूल ही जाओ पत्रकारिता नाम की कोई चीज होती है….सिर्फ चाटुकारिता ही नजर आएगी….
मध्यप्रदेश के पत्रकार द्वारा भेजे गये पत्र पर आधारित.





