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कविलाश के हटने के बाद दैनिक जागरण के आईटीओ आफिस में अफरातफरी का आलम

कविलाश के आइटीओ से हटते ही उसके खास गुर्गों की रातों की नींद उड़ गई है। एक सज्जन तो कार्यालय में अकेला रिपोर्टर होने के बावजूद भी पूर्वी दिल्ली का चीफ बना बैठा है। गाजियाबाद में वह सरकारी दफ्तरों में 100-200 रुपए मांग के लिए बदनाम था। वहीं, पूर्वी दिल्ली पहुंचते ही पहले उसने वहां स्थित सभी रिपोर्टरों को बाहर करवाया।

कविलाश के आइटीओ से हटते ही उसके खास गुर्गों की रातों की नींद उड़ गई है। एक सज्जन तो कार्यालय में अकेला रिपोर्टर होने के बावजूद भी पूर्वी दिल्ली का चीफ बना बैठा है। गाजियाबाद में वह सरकारी दफ्तरों में 100-200 रुपए मांग के लिए बदनाम था। वहीं, पूर्वी दिल्ली पहुंचते ही पहले उसने वहां स्थित सभी रिपोर्टरों को बाहर करवाया।

पूर्वी दिल्ली में वह जहां आनंद विहार बस अ्डा, उत्तर पूर्वी व पूर्वी जिला निगम जोन, पूर्वी दिल्ली नगर निगम से हर माह उगाही करता है, वहीं, जो अवैध निर्माण करने वाला उसे पैसे नहीं देता उनके खिलाफ खुद या फिर किसी अन्य से आरटीआई लगवाकर उसे ब्लैकमेल करता है। वह शख्स हर छोटी व बड़ी खबर पर मिठाई या डिब्बा या फिर राजदरबार का पैकेट मंगवाता है जो मिठाई व राजदरबार नहीं देता उसकी खबर नहीं छपती है। वह केवल उन्हीं की खबर लिखता है जो उसे रुपयों की भेंट चढ़ाता है। जो माल नहीं देता है उसकी निगेटिव खबर लगाकर उनसे पैसों के लिए दबाव बनाया जाता है।

हमेशा मुंह में राजदरबार खाए रहने वाले इस शख्स ने दैनिक जागरण पूर्वी दिल्ली कार्यालय के बोर्ड पर पीक थूक-थूककर उसे लाल कर दिया है। वहीं, छज्जे पर उलटी कर-कर के कई किलो राजदरबार इकट्ठा कर दिया है। उसकी राजदरबार खाने की आदत से बिल्डिंग में स्थित अन्य आफिस वाले काफी परेशान हैं। पूरी बिल्डिंग का सीवरेज बीते दिनों उसके थूक से जाम हो गया था। उस बदतमीज शख्स से जिले का कोई नेता व आरडब्ल्यूए वाला बात करना नहीं चाहता। पाठकों ने रीलिज देने के लिए पूर्वी दिल्ली कार्यालय का रुख करना बंद कर दिया है। इसका नतीजा है कि पिछले कुछ सालों में दैनिक जागरण पूर्वी दिल्ली का सरकुलेशन घटा है जो पहले दिल्ली के सभी सेंटरों से आगे हुआ करता था। हालांकि अब वह शख्स नौकरी की तलाश कर रहा है लेकिन उसकी शिक्षा-दीक्षा बहुत कम है, इसलिए उसे और कहीं नौकरी मिलने में कठिनाई हो रही है।

वहीं, आइटीओ कार्यालय पर कई चीटर टाइप के लोगों पर गाज गिरनी तय है। संस्थान के पास आइटीओ कार्यालय में स्थित वरिष्ठ व कनिष्ठों में से किसी को इंचार्ज बनाने लायक क्षमता नहीं दिख रही है। नतीजन बाहर से ही इंचार्ज लाना प़डेगा। वरिष्ठों को विष्णु त्रिपाठी ने खुद आकर उनके समक्ष ज्ञान का जो प्रकाश फैलाया है उससे सबकी हालत पतली है। कई लोग तो आजकल डर की वजह से दो पैग फालतू लगा रहे हैं।

वहीं एक अन्य सज्जन कमाई का हिसाब-किताब लगा आगे की प्लानिंग कर रहे हैं. एक अन्य ने तो आना ही छो़ड दिया है. कुछ लोग दिल्ली से बाहर अपने ट्रांसफर होने को लेकर चिंतित हैं तो कुछ दिल्ली में छोटे सेंटरों के इंचार्ज बनने की फिराक में लगे बैठे हैं। कुल मिलाकर एक बात है कि जिसने जैसा कर्म किया उसके साथ वैसा ही होने जा रहा है। जिसने लोगों का दिल दुखाया था आज उसकी व उसके गुर्गों की हालत उसके कर्मों की ही परिणति है। 

योगेश कुमार सोनी की रिपोर्ट. संपर्क: 9999907181

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